MP में कक्षा 9वीं के मूल्यांकन का बदलेगा तरीका, अब नंबरों के साथ कौशल और व्यवहार भी होंगे शामिल
मध्य प्रदेश में कक्षा 9वीं के छात्रों के मूल्यांकन का तरीका बदलने की तैयारी है। Holistic Progress Card यानी HPC के तहत नंबरों के साथ कौशल, व्यवहार, गतिविधियों और छात्रों के समग्र विकास का आकलन किया जाएगा।
भोपाल। मध्य प्रदेश में कक्षा 9वीं के छात्रों के मूल्यांकन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया जा रहा है. अब विद्यार्थियों का आकलन सिर्फ परीक्षा में मिले नंबरों से नहीं होगा, बल्कि उनके कौशल, व्यवहार, गतिविधियों और व्यावहारिक समझ को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा. इसके लिए हॉलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC) को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है.
हर जिले के तीन स्कूलों में होगा पायलट प्रोजेक्ट
नई व्यवस्था के पहले चरण में हर जिले के तीन स्कूलों को चुना गया है. इनमें एक सांदीपनि विद्यालय, एक पीएम श्री स्कूल और एक जिला उत्कृष्ट विद्यालय शामिल हैं. इन स्कूलों की कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों पर नई मूल्यांकन व्यवस्था लागू होगी.
सालभर नहीं, 7 महीने चलेगा गतिविधि आधारित मूल्यांकन
HPC के तहत छात्रों को अगस्त से फरवरी तक गतिविधि आधारित प्रोजेक्ट वर्क करना होगा. इस दौरान कुल 120 घंटे की गतिविधियां निर्धारित की गई हैं. छात्रों के व्यक्तिगत विकास, टीम वर्क, व्यावहारिक कौशल और सीखने की प्रक्रिया को अलग-अलग स्तर पर परखा जाएगा.
अगस्त में छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी, स्व-मूल्यांकन, समय प्रबंधन और आगे की तैयारी जैसे विषयों पर काम होगा. सितंबर-अक्टूबर में ग्रुप प्रोजेक्ट, जबकि आगे के महीनों में अलग-अलग गतिविधियां कराई जाएंगी. फरवरी में शिक्षक अंतिम मूल्यांकन करेंगे और छात्रों को रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी.
क्या है Holistic Progress Card?
NCERT के PARAKH कार्यक्रम के तहत तैयार HPC एक 360 डिग्री मूल्यांकन प्रणाली है. इसमें सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि विद्यार्थी की विभिन्न क्षमताओं और उसके समग्र विकास को देखा जाता है. इसमें शिक्षक का आकलन, छात्र का स्व-मूल्यांकन, साथियों की प्रतिक्रिया, प्रोजेक्ट वर्क और गतिविधियों जैसे पहलुओं को भी शामिल किया जा सकता है. फिलहाल मध्य प्रदेश में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा रहा है. शुरुआती अनुभव के आधार पर आगे इसे दूसरे स्कूलों तक विस्तार देने पर फैसला लिया जा सकता है.

