2029 से लागू हो सकता है वन नेशन-वन इलेक्शन, JPC बोली- 99% लोगों का समर्थन
वन नेशन-वन इलेक्शन पर सरकार का टू-फेज प्लान, 2029 से शुरू हो सकती है नई चुनाव व्यवस्था, संसदीय समिति ने तेज की तैयारी
देश में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार और संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) तेजी से काम कर रही है। समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने कहा है कि अब तक चर्चा में शामिल लगभग 99 प्रतिशत नागरिकों और संगठनों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। समिति विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से लगातार सुझाव ले रही है। सरकार की कोशिश है कि 2029 के लोकसभा चुनावों से इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
दो चरणों में लागू करने की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, सरकार और जेपीसी 'टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल' पर विचार कर रही है। इस मॉडल का उद्देश्य सभी राज्यों को एक साथ चुनावी चक्र में लाना है, लेकिन बिना बड़े पैमाने पर विधानसभा कार्यकाल में कटौती या बार-बार चुनाव कराने की जरूरत के। प्रस्ताव के अनुसार पहले चरण में 2029 के लोकसभा चुनावों के साथ करीब 20 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। इसके बाद दूसरे चरण में वर्ष 2034 तक बाकी राज्यों को भी इसी चुनावी चक्र में शामिल करने की योजना है। संयुक्त संसदीय समिति का कार्यकाल 2026 के मानसून सत्र तक बढ़ा दिया गया है, जिससे इस विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श जारी रहेगा।
संवैधानिक विकल्प पर सहमति जरूरी
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि संविधान में ऐसे प्रावधान मौजूद हैं जिनके जरिए चरणबद्ध तरीके से 'एक देश-एक चुनाव' लागू किया जा सकता है। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज के डीन और लॉ कमीशन के पूर्व सदस्य आनंद पालीवाल के अनुसार, कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव समय से पहले कराए जा सकते हैं, जबकि कुछ राज्यों में विशेष परिस्थितियों में कार्यकाल बढ़ाने का विकल्प भी उपलब्ध है। हालांकि, इस तरह के बड़े बदलाव के लिए संसद में आवश्यक संवैधानिक संशोधन, कानूनी प्रावधान और व्यापक राजनीतिक सहमति अनिवार्य होगी।
कोविंद समिति ने तैयार की थी रिपोर्ट
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 2 सितंबर 2023 को पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर अध्ययन के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। समिति ने 191 दिनों तक विभिन्न हितधारकों और विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद 14 मार्च 2024 को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी थी। अब संयुक्त संसदीय समिति उस रिपोर्ट और मिले सुझावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय कर रही है। यदि सभी संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं, तो 2029 से देश में एक साथ चुनाव कराने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
Varsha Shrivastava 
