कर्नल सोफिया पर विवादित टिप्पणी: मंत्री विजय शाह पर SC सख्त, CJI बोले- माफी को लेकर बहुत देर हो गई
सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई और मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर दो सप्ताह के भीतर फैसला लें।
मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के मामले में कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने के प्रश्न पर दो सप्ताह के भीतर फैसला ले। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में अब और देरी स्वीकार्य नहीं है।
राज्य सरकार महीनों से कोई निर्णय नहीं ले रही
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने राज्य सरकार की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) अपनी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट पहले ही दाखिल कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार महीनों से कोई निर्णय नहीं ले रही है। जबकि भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत (जो सांप्रदायिक घृणा और दुर्भावना को बढ़ावा देने से संबंधित है) अपराध का संज्ञान लेने के लिए राज्य सरकार की अभियोजन स्वीकृति जरूरी है।
सुनवाई के दौरान विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है और वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह कोई वास्तविक माफी नहीं है और माफी मांगने में अब बहुत देर हो चुकी है। अदालत ने दो टूक कहा कि इस तरह की ऑनलाइन या औपचारिक माफी को गंभीर अपराध के संदर्भ में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने ऑनलाइन माफी पर भी असंतोष जताया
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी विजय शाह की माफी को लेकर कड़ा रुख दिखाया था। पिछली सुनवाइयों में अदालत ने उनकी सार्वजनिक माफी को “कानूनी दायित्व से बचने के लिए मगरमच्छ के आंसू” करार दिया था और उनकी ऑनलाइन माफी पर भी असंतोष जताया था। सोमवार की सुनवाई में भी अदालत ने यही रुख दोहराया और कहा कि एक जनप्रतिनिधि और सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से जिम्मेदार और संवेदनशील भाषा की अपेक्षा की जाती है।
गौरतलब है कि 11 मई 2025 को इंदौर के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में आयोजित ‘हलमा’ कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने एक भाषण में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे सेना की एक वरिष्ठ महिला अधिकारी के सम्मान और गरिमा के खिलाफ माना गया। बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
MP HC के निर्देश पर विजय शाह के खिलाफ FIR दर्ज
इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर 14 मई 2025 को महू के मानपुर थाने में विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद मंत्री शाह ने इस एफआईआर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सोमवार 19 मई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को अपने शब्दों के प्रति बेहद सतर्क रहना चाहिए। अदालत ने कहा, “आप एक पब्लिक फिगर हैं, आपके शब्दों का समाज पर गहरा असर पड़ता है।”
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि एसआईटी की रिपोर्ट में जिन अन्य कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का जिक्र किया गया है, उन पर भी की जाने वाली प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर एसआईटी अलग से रिपोर्ट पेश करे। अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि वह केवल यह कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए उसने कोई फैसला नहीं लिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार कार्रवाई करना राज्य सरकार का दायित्व है।
राज्य सरकार की ओर से पहले यह दलील दी गई थी कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण अभियोजन स्वीकृति पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इस पर अदालत ने असंतोष जताते हुए कहा कि यह तर्क स्वीकार्य नहीं है और राज्य को कानून के तहत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा।
Varsha Shrivastava 
