70 साल के पिता की मौत पर भी नहीं पहुंचे बच्चे, बोले- आप ही अंतिम संस्कार करवा दीजिए
भोपाल में 70 वर्षीय घनश्याम सिंह की मौत के बाद उनके बच्चे अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचे। बेटों ने वृद्धाश्रम संचालिका से ही अंतिम संस्कार कराने को कहा, जिसके बाद पुलिस की मदद से अंतिम संस्कार हुआ।
भोपाल। भोपाल से रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है. 70 साल के घनश्याम सिंह की मौत के बाद उनके बेटे-बेटी अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं पहुंचे. बताया जा रहा है कि घनश्याम सिंह पिछले करीब ढाई साल से भोपाल के ‘अपना घर’ वृद्धाश्रम में रह रहे थे. उनकी मौत के बाद जब वृद्धाश्रम संचालिका ने बच्चों को सूचना दी तो उन्होंने खुद आने के बजाय अंतिम संस्कार करवाने की जिम्मेदारी वृद्धाश्रम प्रबंधन पर ही छोड़ दी.
बेटी ने कहा- पिता से मेरा कोई मतलब नहीं
‘अपना घर’ की संचालिका माधुरी मिश्रा के मुताबिक, घनश्याम सिंह इंदौर के रहने वाले थे. उनके दो बेटे और एक बेटी हैं. मौत की सूचना मिलने के बाद जब संचालिका ने उनकी बेटी को फोन किया तो उसने कथित तौर पर कहा कि “हमारा उनसे कोई मतलब नहीं है, उन्होंने हमें कुछ नहीं दिया. इसके बाद बेटी ने संचालिका से उनके बेटों से संपर्क करने को कहा.
बेटों ने भी आने से कर दिया इनकार
माधुरी मिश्रा के अनुसार, जब घनश्याम सिंह के बेटों से फोन पर बात की गई तो उन्होंने भी भोपाल आने से इनकार कर दिया। आरोप है कि बेटों ने कहा कि “आप ही अंतिम संस्कार कर दीजिए और हमें डेथ सर्टिफिकेट पहुंचा दीजिए. परिजनों के इस जवाब के बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन ने पुलिस की मदद ली और बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कराया.
भदभदा विश्राम घाट में हुआ अंतिम संस्कार
‘अपना घर’ संचालिका के मुताबिक, घनश्याम सिंह पिछले करीब ढाई साल से वृद्धाश्रम में रह रहे थे. उनके गाल पर बीमारी होने के कारण वह बोल भी नहीं पाते थे. बीमारी के दौरान उनकी देखभाल वृद्धाश्रम में ही की जा रही थी. मौत के बाद परिजनों के नहीं पहुंचने पर पुलिस की मदद से भोपाल के भदभदा विश्राम घाट में घनश्याम सिंह का अंतिम संस्कार किया गया.
आखिरी विदाई में भी नहीं मिला अपनों का साथ
घनश्याम सिंह की मौत का यह मामला सिर्फ एक बुजुर्ग की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और समाज की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करता है. जिस पिता ने अपने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया, उनकी जिंदगी के आखिरी पड़ाव में उनका सहारा परिवार नहीं, बल्कि वृद्धाश्रम बना रहा. और मौत के बाद भी बेटे-बेटी अंतिम विदाई देने नहीं पहुंचे. इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या माता-पिता की जिम्मेदारी सिर्फ बच्चों को पालने तक है, या बच्चों की भी अपने बुजुर्ग माता-पिता के प्रति कोई जिम्मेदारी है?

