डॉक्टर भैया-भाभी का कमाल, 1 लाख मरीजों का किया मुफ्त इलाज; डॉ. रामचंद्र और डॉ. सुनीता को मिला पद्मश्री सम्मान

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और अबूझमाड़ में पिछले 35 साल से मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान मिला है। ‘डॉक्टर भैया-भाभी’ के नाम से मशहूर इस जोड़े ने अब तक 1 लाख से ज्यादा मरीजों का नि:शुल्क इलाज किया है।

डॉक्टर भैया-भाभी का कमाल, 1 लाख मरीजों का किया मुफ्त इलाज; डॉ. रामचंद्र और डॉ. सुनीता को मिला पद्मश्री सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को 66 लोगों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया। इनमें छत्तीसगढ़ के डॉक्टर दंपती डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और अबूझमाड़ जैसे दूरदराज इलाकों में सालों से स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले को पद्मश्री पुरस्कार मिला है। गांवों में लोग उन्हें ‘डॉक्टर भैया-भाभी’ के नाम से जानते हैं।

दोनों डॉक्टरों ने अपनी जिंदगी आदिवासी और गरीब लोगों की सेवा में लगा दी। जहां इलाज की सुविधाएं कम हैं, वहां पहुंचकर उन्होंने हजारों लोगों का मुफ्त इलाज किया। अब तक 1 लाख से ज्यादा मरीजों का डॉक्टर दंपत्ति ने बिना किसी शुल्क के उपचार दिया है। उनकी इसी मेहनत, सेवा और लोगों के प्रति समर्पण को सम्मान देते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें देश के बड़े नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मश्री से नवाजा गया है।

बुधरी ताती को भी पद्मश्री पुरस्कार मिलेगा

इस साल पद्म पुरस्कारों के लिए देश की 131 हस्तियों का चयन किया गया है। राष्ट्रपति भवन में सोमवार को आयोजित समारोह में 66 लोगों को सम्मान दिया गया। बाकी चयनित लोगों को दूसरे कार्यक्रम में पुरस्कार मिलेंगे । दूसरे चरण की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

इसी समारोह में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा की समाज सेवी बुधरी ताती को भी पद्मश्री पुरस्कार मिलेगा। उन्होंने लंबे समय से सामाजिक कार्यों के जरिए क्षेत्र में खास पहचान बनाई है।

करीब 35 साल से लोगों का मुफ्त इलाज

दक्षिण बस्तर के आदिवासी इलाकों में लोग डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले को प्यार से ‘डॉक्टर भैया-भाभी’ कहकर बुलाते हैं। दोनों पिछले करीब 35 साल से जंगल और दूरदराज गांवों में लोगों का मुफ्त इलाज कर रहे हैं। महाराष्ट्र के सतारा से आने वाले दोनों डॉक्टर साल 1990 में दंतेवाड़ा के बारसूर पहुंचे थे।

इसके बाद उन्होंने यहीं रहकर आदिवासी परिवारों की सेवा को अपना मिशन बना लिया। बीजापुर, सुकमा और दक्षिण बस्तर के कई गांवों में वे लगातार स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे हैं। बच्चों को कुपोषण और खून की कमी से बचाने के लिए भी काम करते हैं। इसके अलावा गांव-गांव जाकर मेडिकल कैंप लगाते हैं और मरीजों की नियमित जांच करते रहते हैं।

एक लाख से ज्यादा लोगों का इलाज

डॉ. रामचंद्र गोडबोले को इलाके के लोग ‘डॉक्टर भैया’ के नाम से जानते हैं। उन्होंने अब तक एक लाख से ज्यादा लोगों का इलाज किया है। उनकी पत्नी डॉ. सुनीता गोडबोले भी ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के बीच स्वास्थ्य और जागरूकता को लेकर लगातार काम कर रही हैं।

दोनों पति-पत्नी बच्चों को पढ़ाई के साथ अच्छी आदतें और स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी बातें भी सिखाते हैं। गांवों में लोगों को बीमारियों से बचाव और साफ-सफाई के प्रति जागरूक करते हैं। डॉ. रामचंद्र कहते हैं कि उनके पास इलाज के लिए आने वाला हर आदिवासी व्यक्ति उनके लिए भगवान जैसा है। यही सोच उन्हें लगातार सेवा करने की प्रेरणा देती है।