FCRA Bill 2026: 12 अगस्त को संसद में आ सकता है बिल, अमित शाह कर सकते हैं पेश
FCRA Amendment Bill 2026 को सरकार 12 अगस्त को संसद में ला सकती है। अमित शाह के इसे लोकसभा में पेश करने की चर्चा के बीच परिसीमन और महिला आरक्षण पर भी नजर है।
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के आखिरी दौर में केंद्र सरकार कुछ अहम विधायी कदम आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इनमें FCRA Amendment Bill 2026 भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार, सरकार 12 अगस्त को इस विधेयक को लोकसभा में लाने की तैयारी कर रही है और इसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पेश कर सकते हैं।हालांकि, बिल को लेकर अंतिम स्थिति संसद की कार्यसूची और सरकार के फैसले से ही स्पष्ट होगी। मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म होना है, इसलिए सरकार के पास इस विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए अब ज्यादा समय नहीं बचा है।
FCRA कानून में बदलाव क्यों?
FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act के तहत भारत में आने वाले विदेशी चंदे और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित किया जाता है। प्रस्तावित संशोधन के जरिए सरकार विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों और निगरानी व्यवस्था में बदलाव करना चाहती है।
केंद्र सरकार का तर्क है कि विदेशी योगदान के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। दूसरी ओर, विपक्ष और कुछ संगठनों को आशंका है कि नए प्रावधानों से NGO, धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के कामकाज पर असर पड़ सकता है।इसी वजह से विधेयक को लेकर राजनीतिक विरोध भी शुरू हो चुका है।
मिजोरम से भी उठी आपत्ति
FCRA में प्रस्तावित बदलावों को लेकर मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा और राज्य के कुछ ईसाई संगठनों ने केंद्र के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर प्रस्तावित कानून को लेकर राज्य की आशंकाओं पर चर्चा की थी।मिजोरम की ओर से खास तौर पर इस बात को लेकर चिंता जताई गई है कि नए नियम धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के विदेशी योगदान से जुड़े काम पर असर डाल सकते हैं।केंद्र की ओर से हालांकि यह संकेत दिया गया है कि कानून का उद्देश्य किसी विशेष धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं है।
सरकार की प्राथमिकता क्या है?
बीजेपी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सरकार की कोशिश है कि अगर FCRA संशोधन विधेयक संसद में आता है तो इसे इसी मानसून सत्र में आगे बढ़ाया जाए। इसके लिए साधारण बहुमत पर्याप्त होगा।वहीं दूसरी तरफ परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक कहीं ज्यादा जटिल मामला है। उसे पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरूरत होगी।यही वजह है कि सरकार दोनों मुद्दों को एक ही रणनीति से आगे नहीं बढ़ा सकती।
परिसीमन और महिला आरक्षण का मामला भी अहम
2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था लागू करने के लिए परिसीमन जरूरी कड़ी मानी जा रही है।सरकार पहले भी परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन लाने की कोशिश कर चुकी है। लेकिन विपक्ष के विरोध और पर्याप्त समर्थन नहीं जुट पाने के कारण वह प्रयास आगे नहीं बढ़ सका।अब सरकार इस मुद्दे पर नए सिरे से राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।
दक्षिणी राज्यों की चिंता क्या है?
परिसीमन का सबसे बड़ा विवाद जनसंख्या के आधार को लेकर है।दक्षिण भारत के कई राज्यों को डर है कि अगर भविष्य में लोकसभा सीटों का बंटवारा मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर किया गया तो ज्यादा आबादी वाले राज्यों की सीटें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका असर संसद में दक्षिणी राज्यों के मौजूदा राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है।यही वजह है कि दक्षिणी राज्यों की पार्टियां लंबे समय से परिसीमन को लेकर सावधानी बरतने की मांग करती रही हैं।सरकार की तरफ से अब राज्यों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि सीटों में बढ़ोतरी के साथ मौजूदा प्रतिनिधित्व को अचानक कम होने से कैसे बचाया जा सकता है।
2027 की जनगणना के बाद बदल जाएगा समीकरण
परिसीमन की पूरी बहस को समझने के लिए 2027 की जनगणना अहम है। मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था के तहत 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़े सामने आने के बाद परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता खुलता है।इसका मतलब है कि आने वाले कुछ सालों में लोकसभा सीटों की संख्या और उनके पुनर्वितरण को लेकर बड़ा बदलाव हो सकता है।अगर परिसीमन की प्रक्रिया समय पर आगे बढ़ती है तो 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की व्यवस्था लागू करने का रास्ता भी खुल सकता है।
क्या विशेष सत्र बुलाया जा सकता है?
अगर सरकार दक्षिणी राज्यों और दूसरे राजनीतिक दलों के साथ परिसीमन पर सहमति बनाने में सफल होती है, तो आने वाले महीनों में संसद का विशेष सत्र बुलाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।हालांकि, अभी इस बारे में कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। फिलहाल सरकार का तत्काल फोकस मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में जरूरी विधेयकों को आगे बढ़ाने पर है।
FCRA से लेकर परिसीमन तक, संसद में बढ़ेगी गर्मी
एक तरफ सरकार FCRA कानून में बदलाव को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ परिसीमन और महिला आरक्षण का मुद्दा भी राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना हुआ है।FCRA बिल पर जहां साधारण बहुमत का सवाल है, वहीं परिसीमन के लिए विपक्ष और राज्यों का समर्थन जुटाना सरकार के सामने बड़ी चुनौती होगी।अब सबकी नजर 12 अगस्त की संसद की कार्यवाही पर है। अगर FCRA संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश होता है, तो सरकार और विपक्ष के बीच इस पर तीखी बहस की संभावना है। वहीं परिसीमन को लेकर सरकार की अगली चाल आने वाले महीनों की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
Anubhav Dubey 
