मऊगंज में पंचायत विकास पर सवाल, मुक्तिधाम अधूरे और सोलर लाइट गायब
मऊगंज और रीवा की कई ग्राम पंचायतों में शांति धाम, खेल मैदान और सोलर लाइट योजनाओं की जमीनी स्थिति पर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों ने फर्जी बिलों की जांच और अधूरे कार्य पूरे कराने की मांग की है।
मऊगंज। सरकार की मंशा है कि गांवों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए। पंचायतों में शांति धाम, खेल मैदान, ओपन जिम और सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी योजनाओं के लिए बड़ी राशि खर्च की जाती है। लेकिन मऊगंज और रीवा जिले की कई ग्राम पंचायतों में इन योजनाओं की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से अलग नजर आ रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद कई विकास कार्य अधूरे पड़े हैं, जबकि कुछ योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। ग्रामीणों का कहना है— “बिल बन गए, पैसा निकल गया, लेकिन काम कहीं दिखाई नहीं दे रहा।”
शांति धाम अधूरे, अंतिम संस्कार में भी परेशानी
बरसात का मौसम आते ही कई पंचायतों में बने शांति धाम और मुक्तिधाम की स्थिति सामने आ जाती है। शासन की ओर से पंचायतों में मुक्तिधाम निर्माण के लिए राशि जारी की गई थी, ताकि बारिश और गर्मी के मौसम में अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को परेशानी न हो।
लेकिन कई जगह निर्माण नींव के बाद ही रुक गया। कहीं आधा-अधूरा निर्माण पड़ा है तो कहीं बिना छत के ढांचे खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। कई स्थानों पर चारदीवारी तक नहीं है। ऐसे में किसी की मृत्यु होने पर परिजनों को खुले आसमान के नीचे या तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ता है।
खेल मैदान फाइलों में पास, जमीन पर नदारद
ग्रामीण युवाओं और बच्चों को खेल से जोड़ने के लिए पंचायतों में खेल मैदान और ओपन जिम विकसित करने की योजनाएं बनाई गईं। इसके लिए प्रस्ताव और एस्टीमेट तैयार किए गए, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कई गांवों में खेल मैदान आज भी दिखाई नहीं देते।
कहीं जमीन समतल नहीं की गई तो कहीं मैदान के लिए जगह तक चिन्हित नहीं है। खेल उपकरण और ओपन जिम की सुविधा तो दूर, बच्चों और युवाओं को आज भी सड़क, स्कूल परिसर या खेतों के आसपास खेलना पड़ रहा है।
सोलर स्ट्रीट लाइट के नाम पर गांवों में अंधेरा
ऊर्जा की बचत और गांवों की सड़कों को रोशन करने के उद्देश्य से सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने की योजना शुरू की गई। लेकिन कई गांवों में रात होते ही अंधेरा छा जाता है।
कहीं खंभे लगे हैं लेकिन सोलर पैनल गायब हैं, कहीं बैटरियां खराब हैं तो कहीं लाइट के खंभे ही नजर नहीं आते। खराब और चोरी हुई सोलर लाइटों की मरम्मत और रखरखाव की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों के मुताबिक, अंधेरे के कारण महिलाओं और बुजुर्गों को रात में घर से बाहर निकलने में परेशानी होती है।
सबसे बड़ा सवाल—पैसा गया तो कहां?
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ पंचायतों में सरपंच, सचिव और संबंधित एजेंसियों की मिलीभगत से फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान निकाले जाने की आशंका है। उनका आरोप है कि कई जगह काम पूरा हुए बिना ही कागजी खानापूर्ति कर दी जाती है।
हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विकास कार्यों और भुगतान का पंचायतवार भौतिक सत्यापन कराया जाए तो पूरी स्थिति सामने आ सकती है।
ग्रामीणों ने की तीसरे पक्ष से जांच की मांग
ग्रामीणों ने मऊगंज कलेक्टर से मांग की है कि सभी पंचायतों में शांति धाम, खेल मैदान और सोलर स्ट्रीट लाइट से जुड़े कार्यों का तीसरे पक्ष से पंचायतवार सत्यापन कराया जाए। अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए समय-सीमा तय की जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदारी निर्धारित हो।
ग्रामीणों की मांग है कि जिन मामलों में जांच के दौरान फर्जी बिल या बिना काम के भुगतान की पुष्टि हो, वहां जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर राशि की रिकवरी की जाए। साथ ही भविष्य में विकास कार्यों के भुगतान से पहले ग्रामसभा से सत्यापन और जियो-टैग फोटो अनिवार्य किए जाएं।
Anubhav Dubey 
