मऊगंज में पहली बारिश ने खोली नगर परिषदों की पोल, जलभराव से जनता बेहाल
मानसून दस्तक देने के साथ ही स्थानीय प्रशासन और नगर निकायों की तैयारियों का सच सामने आ गया है। सोमवार मंगलवार को जिले में हुई पहली हल्की बारिश ने ही मऊगंज, हनुमना और नईगढ़ी नगर परिषद की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी।
राजेंद्र पयासी, मऊगंज। जिले में मानसून की पहली बारिश ने नगर परिषदों की तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी। सोमवार और मंगलवार को हुई हल्की बारिश के बाद ही मऊगंज, हनुमना और नईगढ़ी नगर परिषद क्षेत्रों में कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन गई। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ, जबकि नालियों का गंदा पानी कई इलाकों में घरों तक पहुंच गया। इससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सबसे अधिक प्रभावित नईगढ़ी नगर परिषद क्षेत्र रहा। यहां मुख्य बाजार सहित कई मोहल्लों में पानी भर गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मानसून शुरू होने से पहले नालियों की सफाई नहीं कराई गई और जल निकासी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई। इसके चलते पहली ही बारिश में पूरे क्षेत्र की व्यवस्था चरमरा गई।

इसी तरह मऊगंज और हनुमना नगर परिषद क्षेत्रों में भी जल निकासी व्यवस्था कमजोर साबित हुई। कई सड़कों पर पानी भरने से लोगों को घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष बारिश से पहले तैयारियों के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार दिखाई नहीं देता।
नगर परिषदों पर लापरवाही के आरोप
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि जिला प्रशासन ने मानसून पूर्व सभी नगर परिषदों को नालियों की सफाई कराने, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और नालियों पर हुए अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल सफाई और जल निकासी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है, लेकिन पहली ही बारिश में नगर परिषदों की व्यवस्थाएं जवाब दे देती हैं। लोगों का आरोप है कि शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती और हर वर्ष यही स्थिति दोहराई जाती है।
बढ़ा बीमारी और हादसों का खतरा
समाजसेवी कमलेश पटेल ने कहा कि मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में और तेज बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में यदि तत्काल जल निकासी की व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो कच्चे मकानों को नुकसान पहुंच सकता है। जलभराव के कारण डेंगू, मलेरिया सहित अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। कई गांवों और शहरी इलाकों में बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं, जबकि मरीजों को अस्पताल जाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

जनता ने प्रशासन से की ये मांगें
आक्रोशित नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तीनों नगर परिषदों में तत्काल नालियों की सफाई कर जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही मानसून पूर्व जारी निर्देशों का पालन नहीं करने वाले नगर परिषद के सीएमओ और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए।

लोगों ने यह भी मांग की है कि भविष्य में जलभराव की समस्या से स्थायी राहत के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाए, ताकि हर साल बारिश के दौरान जनता को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब हर साल बारिश से पहले बजट स्वीकृत होता है, बैठकें आयोजित होती हैं और निरीक्षण किए जाते हैं, तो पहली ही बारिश में नगर परिषदों की व्यवस्थाएं क्यों ध्वस्त हो जाती हैं। लोगों ने इस पूरे मामले की जांच कर जवाबदेही तय करने की मांग भी की है।

