MP Cheetah Project : CM डॉ. मोहन यादव ने गांधीसागर में छोड़ी मादा चीता, अभयारण्य में बढ़ा चीतों का कुनबा
MP Cheetah Project : मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय एशिया से चीते विलुप्त हो गए थे और मध्य प्रदेश में भी उनकी मौजूदगी खत्म हो गई थी। अब प्रदेश की धरती पर एक बार फिर चीते स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं।
MP Cheetah Project : मध्य प्रदेश। नीमच जिले स्थित गांधीसागर अभयारण्य में बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता CCB-2 को रविवार को छोड़ा गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे अभयारण्य में छोड़ा। उन्होंने इसका नाम राधा रखा। CCB-2 के आने के बाद गांधीसागर अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। इनमें दो नर और दो मादा चीते शामिल हैं।
वन्यजीव संरक्षण में अग्रणी "मध्यप्रदेश"
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) September 20, 2026
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज चीता प्रोजेक्ट के तहत नीमच जिले के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता (CCB-2) को खुले जंगल में विमुक्त किया।
मादा चीता को बोत्सवाना से कूनो नेशनल पार्क लाया गया था। अब इसे गांधी… pic.twitter.com/x10Fck23VK
चीता संरक्षण पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश सरकार चीता संरक्षण की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने चीता प्रोजेक्ट को मध्य प्रदेश के साथ-साथ एशिया के लिए भी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परियोजना बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय एशिया से चीते विलुप्त हो गए थे और मध्य प्रदेश में भी उनकी मौजूदगी खत्म हो गई थी। अब प्रदेश की धरती पर एक बार फिर चीते स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। उनके मुताबिक, वर्तमान में मध्य प्रदेश में चीते और उनके शावकों की कुल संख्या 56 है।
वन विभाग को दी बधाई
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि चीता संरक्षण की उपलब्धि वन्यजीवों के प्रति ‘जियो और जीने दो’ की भावना को दर्शाती है। उन्होंने इसे वन विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी।
जैव-विविधता संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश का वनांचल और वन्यजीव संरक्षण का समृद्ध इतिहास रहा है। प्रदेश में चीतों की दोबारा मौजूदगी प्राकृतिक वैभव और जैव-विविधता के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है। गांधी सागर में पहले से ‘प्रभास’ और ‘पावक’ नाम के नर चीते और ‘धीरा’ नाम की मादा चीता मौजूद हैं। नई मादा चीता गांधी सागर में पहुंचने वाली दूसरी मादा चीता होगी। अब नए चीते के आने से क्षेत्र में चीतों का कुनबा और मजबूत होगा।

