Russia Sanctions Bill : ट्रंप ने 100% टैरिफ वाले बिल पर किया साइन, जानें भारत और चीन पर कैसे पड़ेगा असर
Russia Sanctions Bill : इस कानून का मकसद एनर्जी एक्सपोर्ट से मॉस्को की कमाई कम करना और यूक्रेन युद्ध को लेकर उस पर दबाव बढ़ाना है।
Russia Sanctions Bill : वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर अमेरिका 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है। भारत और चीन भी इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं।
हालांकि, कानून बनने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लागू हो गया है। टैरिफ लगाना है या नहीं और उसकी दर क्या होगी, इसका फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के पास रहेगा।
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से मिली मंजूरी
जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को बिल को 262-159 वोट से मंजूरी दी। इससे पहले अमेरिकी सीनेट में अगस्त में इसे 86-11 वोट से पारित किया गया था। कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के अलावा वरिष्ठ अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी बताया गया है।
भारत और चीन पर क्यों पड़ सकता है असर?
इस कानून के तहत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष देशों के सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान है। दिए गए इनपुट के अनुसार इस सूची में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से भारतीय तेल आयात में तेजी आई और रूस भारत के प्रमुख क्रूड सप्लायरों में शामिल हो गया।
भारत रूस से तेल खरीदता रहा तो क्या होगा?
अगर भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है और अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर इसका असर पड़ सकता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा होने की स्थिति में टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग सामान, लेदर, समुद्री उत्पाद और केमिकल जैसे क्षेत्रों पर दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक असर टैरिफ की दर, उसके दायरे और किन उत्पादों पर शुल्क लगाया जाता है, इस पर निर्भर करेगा।
रूस से दूरी बनाने पर भारत के सामने क्या विकल्प?
यदि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करता है, तो उसे दूसरे देशों से अधिक तेल खरीदना पड़ सकता है। भारत पहले से इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, कतर, नाइजीरिया, अंगोला, ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों से कच्चा तेल आयात करता है।
दूसरे सप्लायर्स से खरीद बढ़ने पर तेल की लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों के आधार पर भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है, हालांकि यह सीधे तौर पर तय नहीं है।
कानून कब प्रभावी होगा?
कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर प्रभावी होगा। इसमें राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने और कुछ परिस्थितियों में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को संबंधित देशों की सूची की समीक्षा हर 180 दिन में करने का प्रावधान बताया गया है।
भारत ने क्या कहा?
भारत ने रूस से तेल खरीद के मामले में अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की बात कही है। भारत का रुख यह रहा है कि वह बाजार की परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग देशों से ऊर्जा की खरीद जारी रखेगा।
इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल तेल कारोबार तक सीमित नहीं है। यह भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों के बीच संतुलन का मुद्दा भी बन सकता है।

