लखनऊ: मोबाइल की किस्त बनी मुसीबत! बंधक बनाकर काम कराने और खून निकालने का आरोप

लखनऊ के निगोहां में मोबाइल की किस्त को लेकर युवक को कथित तौर पर बंधक बनाने का मामला सामने आया है। परिवार ने ब्लड बैंक ले जाकर खून निकालने और जबरन काम कराने का आरोप लगाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

लखनऊ: मोबाइल की किस्त बनी मुसीबत! बंधक बनाकर काम कराने और खून निकालने का आरोप

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निगोहां थाना क्षेत्र के राजारामखेड़ा पुरहिया गांव में मोबाइल फोन की किस्त को लेकर युवक नेवल कुमार को कथित तौर पर कई दिनों तक बंधक बनाए रखने का मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि उसे ब्लड बैंक ले जाकर एक यूनिट खून निकलवाया गया और बाद में सदर इलाके के एक मकान में रखकर जबरन काम कराया गया। मामले में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच कर रही है।

मोबाइल की किस्त को लेकर शुरू हुआ विवाद

परिवार के मुताबिक, नेवल कुमार ने करीब एक साल पहले निगोहां कस्बे की गीता मोबाइल शॉप से जीरो डाउन पेमेंट पर मोबाइल फोन लिया था। फोन की मासिक किस्त 2,799 रुपये बताई गई है। एक किस्त बकाया होने के बाद मोबाइल को वापस लिए जाने की बात भी सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि 8 सितंबर को दो लोग स्कूटी से गांव पहुंचे और नेवल को अपने साथ ले गए। इसके बाद परिवार को उसकी जानकारी नहीं मिली। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मामले में शुभम सिंह समेत एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

ब्लड बैंक ले जाने-जबरन काम कराने का आरोप

परिवार का कहना है कि नेवल को पहले लखनऊ के एक ब्लड बैंक ले जाया गया, जहां कथित तौर पर उसके शरीर से एक यूनिट खून निकाला गया। इसके बाद उसे सदर क्षेत्र के एक मकान में कई दिनों तक रखा गया और वहां उससे जबरन काम कराने का आरोप है। पुलिस की ताजा जानकारी के मुताबिक, नेवल का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है और उसके हाथ से खून निकाले जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि, खून बेचने की बात को लेकर पुलिस अभी जांच कर रही है। पूछताछ में हिरासत में लिए गए संदिग्धों ने कथित तौर पर अपने फरार साथी के बारे में ऐसी बात बताई है, लेकिन खून कहां और किसे बेचा गया, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पुलिस के हस्तक्षेप के बाद युवक थाने पहुंचा  

परिवार का आरोप है कि नेवल को छोड़ने के लिए पहले 2,799 रुपये की बकाया किस्त जमा कराने को कहा गया। परिवार ने ऑनलाइन रकम भेज दी, लेकिन इसके बाद भी उसे नहीं छोड़ा गया और करीब 12 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे गए। परिजनों के मुताबिक, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद नेवल को पांचवें दिन एक कैब के जरिए थाने भेजा गया। कैब का किराया भी उसके भाई ने चुकाया। परिवार ने इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत की, जिसके बाद मामले में  FIR दर्ज की गई।

पुलिस ने FIR दर्ज कर शुरू की जांच

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश में टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस ने मोबाइल की किस्त की वसूली किस वित्तीय कंपनी और किन एजेंटों से जुड़ी थी, इसकी भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। गीता मोबाइल शॉप के संचालक से भी पूछताछ की गई है।

दुकान संचालक ने पुलिस को बताया है कि दुकान का काम केवल मोबाइल बेचने तक सीमित है और वित्तपोषण के बाद किस्त वसूली की जिम्मेदारी संबंधित वित्त कंपनी के एजेंटों की होती है। पुलिस अब युवक के साथ हुई पूरी घटना, खून निकाले जाने और किस्त वसूली से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में जो तथ्य जांच के बाद सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।