Kishau Project Agreement : 6 राज्यों के बीच किशाऊ परियोजना पर समझौता, 97 हजार हेक्टेयर जमीन होगी सिंचित
Kishau Project Agreement : गृह मंत्री ने कहा कि यमुना की सफाई का असर गंगा पर भी पड़ेगा। यमुना प्रयागराज में गंगा में मिलती है इसलिए यमुना को स्वच्छ करना गंगा की स्वच्छता के लिए भी जरूरी है।
Kishau Project Agreement : नई दिल्ली। किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर बड़ा समझौता हुआ है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की मौजूदगी में छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इसमें शामिल रहे। केंद्र सरकार ने इसे लंबे समय से लंबित परियोजना को आगे बढ़ाने वाला अहम कदम बताया है।
▪️In the presence of Union Ministers @AmitShah and @CRPaatil, Chief Ministers of Uttar Pradesh @myogiadityanath, Uttarakhand @pushkardhami, Himachal Pradesh @SukhuSukhvinder, Rajasthan @BhajanlalBjp, Delhi @gupta_rekha, and Haryana @NayabSainiBJP signed the Kishau Project… pic.twitter.com/3R05jTNjq6
— PIB India (@PIB_India) September 15, 2026
चार दशक से अटकी थी परियोजना
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि किशाऊ परियोजना को लेकर 12 मई 1994 को समझौता हुआ था। इसके बाद यह परियोजना लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। अब छह राज्यों की सहमति से इसे गति मिलने की उम्मीद है। शाह ने सभी मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल को समझौते के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी राज्य और केंद्र सरकार परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए मिलकर काम करेंगे।

राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिला
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है। इसके तहत परियोजना की करीब 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार उठाएगी। बाकी 10 प्रतिशत राशि संबंधित भागीदार राज्य वहन करेंगे। अमित शाह ने कहा कि उत्तराखंड की वित्तीय चिंताओं को दूर करने के लिए भी केंद्र सरकार सहयोग करेगी। इसके लिए केंद्र की योजनाओं के जरिए मदद देने का प्रयास किया जाएगा।
टोंस नदी पर बनेगा बड़ा बांध
परियोजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनाया जाएगा। इस बांध में करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण होगा। परियोजना से लगभग 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होने की बात कही गई है। इसके साथ ही 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
दिल्ली को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
गृह मंत्री अमित शाह के मुताबिक, किशाऊ परियोजना का सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को मिलने की उम्मीद है। परियोजना से यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यमुना के पुराने जल बंटवारे में नदी के पर्यावरणीय प्रवाह का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया था। किशाऊ परियोजना से मिलने वाला करीब 25 प्रतिशत जल दिल्ली और यमुना दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

यमुना की सफाई से जुड़ा दावा
गृह मंत्री ने कहा कि यमुना की सफाई का असर गंगा पर भी पड़ेगा। यमुना प्रयागराज में गंगा में मिलती है। इसलिए यमुना को स्वच्छ करना गंगा की स्वच्छता के लिए भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियां यमुना की सफाई के लिए काम कर रही हैं। किशाऊ परियोजना से मिलने वाला पानी इस दिशा में मददगार हो सकता है।
जल विवादों के समाधान का दावा
अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह दसवां जल विवाद सुलझने जा रहा है। उन्होंने 2018 से अब तक लखवार, शाहपुर कंडी और रेणुकाजी जैसी परियोजनाओं का उदाहरण दिया। केन-बेतवा लिंक परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक और अन्य जल संबंधी मामलों में हुई प्रगति का भी उन्होंने उल्लेख किया। उनके अनुसार, केंद्र सरकार राज्यों के बीच बातचीत के जरिए लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने पर जोर दे रही है।
2019 के बाद बढ़ी किशाऊ परियोजना की रफ्तार
अमित शाह ने कहा कि लखवार और रेणुकाजी परियोजनाओं पर सहमति बनने के बाद किशाऊ परियोजना का रास्ता भी साफ हुआ। उनके अनुसार, बीते 16 जून को परियोजना को लेकर औपचारिक सहमति बनी थी। इसके बाद जल शक्ति मंत्रालय ने राज्यों के साथ चर्चा की। तकनीकी और आर्थिक पहलुओं पर विचार करने के बाद समझौते को अंतिम रूप दिया गया।
‘टीम इंडिया’ की भावना का उदाहरण
अमित शाह ने समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि छह राज्यों ने एक दिशा में आगे बढ़ने की सहमति दी है। उनके अनुसार, इसी तरह संवाद और सहयोग के जरिए बड़े विवादों का समाधान संभव है। परियोजना पूरी होने के बाद पेयजल, सिंचाई, बिजली और औद्योगिक जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
खेती और बिजली दोनों को फायदा
किशाऊ परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे कृषि क्षेत्र को फायदा मिल सकता है। वहीं, 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इससे ऊर्जा क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। पानी के भंडारण और वितरण से कई राज्यों की जल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

