Masood Azhar Bounty :आतंक पर पाकिस्तान का नया ड्रामा, टेररिस्ट मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर किया 70 लाख

Masood Azhar Bounty : पाकिस्तान ने भारतीय संसद पर हमले के आरोपी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के प्रमुख मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया है।

Masood Azhar Bounty :आतंक पर पाकिस्तान का नया ड्रामा, टेररिस्ट मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर किया 70 लाख

Masood Azhar Bounty : इस्लामाबाद। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी FIA ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को अपनी नई रेड बुक में फिर भगोड़ा घोषित किया है। एजेंसी ने उस पर घोषित इनाम को बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया है। वर्ष 2021 में FIA ने अजहर को भगोड़ा घोषित करते हुए 50 लाख रुपये का इनाम रखा था। अब करीब पांच साल बाद इनाम की रकम बढ़ाई गई है। यह कदम अक्टूबर में होने वाली FATF की बैठक से पहले उठाया गया है। ऐसे में इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय दबाव और पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी छवि से जोड़कर देखा जा रहा है।

संसद और कई आतंकी हमलों में आरोपी

मसूद अजहर भारत में कई बड़े आतंकी मामलों में आरोपी रहा है। इनमें 13 दिसंबर 2001 का संसद हमला, 2 जनवरी 2016 का पठानकोट एयरबेस हमला और 14 फरवरी 2019 का पुलवामा हमला शामिल हैं। संसद हमले में 9 सुरक्षाकर्मियों और एक कर्मचारी की मौत हुई थी।

पठानकोट हमले में 7 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। पुलवामा में CRPF के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 40 जवान शहीद हुए। भारतीय जांच एजेंसियों ने इन मामलों में जैश-ए-मोहम्मद और मसूद अजहर की भूमिका को लेकर जांच की है।

कंधार विमान हाईजैक के बाद हुई रिहाई

मसूद अजहर को 1999 के कंधार विमान अपहरण के बाद भारत की जेल से रिहा किया गया था। 24 दिसंबर 1999 को इंडियन एयरलाइंस के काठमांडू से दिल्ली आ रहे विमान IC-814 का अपहरण किया गया था। विमान को अमृतसर, लाहौर और दुबई होते हुए कंधार ले जाया गया। उस समय अजहर भारत की जेल में बंद था।

वह हरकत-उल-अंसार से जुड़ा था और 1994 में जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार हुआ था। अपहरणकर्ताओं ने उसकी रिहाई की मांग की। 31 दिसंबर 1999 को भारत ने मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख और मुश्ताक अहमद जरगर को रिहा किया। इसके बदले विमान में मौजूद यात्रियों और क्रू को छोड़ा गया।

जेल से निकलकर बनाया जैश-ए-मोहम्मद 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार, भारत की जेल से रिहाई के बाद मसूद अजहर ने 1999 में जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की। इसके बाद यह संगठन भारत के खिलाफ सक्रिय प्रमुख आतंकी संगठनों में शामिल हुआ।

जैश-ए-मोहम्मद को भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों और संस्थाओं ने आतंकी संगठन के तौर पर सूचीबद्ध किया है। मसूद अजहर को संगठन का संस्थापक और प्रमुख माना जाता है।

1994 में पहली बार पहुंचा था भारत 

मसूद अजहर पहली बार 29 जनवरी 1994 को बांग्लादेश से विमान के जरिए ढाका से दिल्ली पहुंचा था। इसके बाद उसने फर्जी पहचान के साथ श्रीनगर में प्रवेश किया। बताया गया कि उसका उद्देश्य हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी और हरकत-उल-मुजाहिदीन के बीच तनाव कम करना था।

इसी दौरान भारत ने उसे आतंकी गतिविधियों से जुड़े आरोपों में अनंतनाग से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय उसने कश्मीर को लेकर भारत विरोधी बयान भी दिया था और आतंकियों के आने का दावा किया था।

1995 में विदेशी पर्यटकों का अपहरण

अजहर की गिरफ्तारी के करीब डेढ़ साल बाद जुलाई 1995 में जम्मू-कश्मीर में छह विदेशी पर्यटकों का अपहरण किया गया। अपहरणकर्ताओं ने पर्यटकों की रिहाई के बदले मसूद अजहर को जेल से छोड़ने की मांग की थी। 

अगस्त 1995 में दो पर्यटक अपहरणकर्ताओं के कब्जे से भागने में सफल रहे। हालांकि, बाकी बंधकों के बारे में बाद में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। यह मामला भी मसूद अजहर की रिहाई की मांग से जुड़े चर्चित मामलों में शामिल रहा।

संसद हमले में क्या आरोप लगा?

13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 9 सुरक्षाकर्मी और एक कर्मचारी की मौत हुई थी। जांच में जैश-ए-मोहम्मद की भूमिका सामने आई थी। मसूद अजहर पर हमले की साजिश और संगठन की भूमिका से जुड़े आरोप लगाए गए। इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस ने की थी। संसद हमले के बाद भारत में आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव हुआ।

पठानकोट हमले में भी नाम आया

2 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला हुआ था। हमले में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों की भूमिका सामने आई थी। इस घटना में 7 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। मसूद अजहर पर हमले की साजिश रचने और आतंकियों को निर्देश देने के आरोप लगाए गए। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने की थी। पठानकोट हमले के बाद भी जैश-ए-मोहम्मद और उसके नेतृत्व को लेकर जांच आगे बढ़ी।

पुलवामा हमले में भी आरोपी

14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था। इस हमले में 40 जवान शहीद हुए थे। भारत ने हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद को जिम्मेदार बताया था। मसूद अजहर पर संगठन के जरिए हमले की साजिश में शामिल होने के आरोप लगे। इस मामले की जांच भी NIA ने की। पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था।

FATF बैठक से पहले कार्रवाई क्यों अहम?

मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाए जाने की टाइमिंग इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अक्टूबर में FATF की बैठक प्रस्तावित है। पाकिस्तान पहले FATF की ग्रे लिस्ट में रह चुका है। उस दौरान देश पर आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव था। 

अक्टूबर 2022 में FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया था। अब नई बैठक से पहले मसूद अजहर जैसे आतंकी के खिलाफ कार्रवाई दिखाना पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम हो सकता है।

ग्रे लिस्ट में जाने पर क्या असर होता है?

FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल होने पर किसी देश की वित्तीय व्यवस्था पर निगरानी बढ़ जाती है। बैंक और कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की जांच ज्यादा कड़ी हो सकती है। आतंकी संगठनों तक पहुंचने वाले धन को रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़ते हैं। 

इसका असर निवेशकों के भरोसे पर भी पड़ सकता है। नए विदेशी निवेश में मुश्किल आ सकती है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और दूसरे देशों से कर्ज या आर्थिक मदद जुटाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ग्रे लिस्ट से बाहर आने के लिए FATF की तय शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है।

क्या है FATF?

FATF यानी Financial Action Task Force आतंकवादी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था है। यह अलग-अलग देशों की वित्तीय व्यवस्था और कार्रवाई की समीक्षा करती है। कमियां मिलने पर किसी देश को ग्रे लिस्ट में रखा जा सकता है। 

पाकिस्तान वर्ष 2018 में ग्रे लिस्ट में आया था और 2022 में उससे बाहर हुआ। वर्ष 2026 में FATF की अगली प्लेनरी बैठक होने वाली है। इसी वजह से पाकिस्तान की नई कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय नजर बनी हुई है।

2021 में पाकिस्तान ने कहा था- अफगानिस्तान भागा अजहर 

पाकिस्तान ने 2021 में दावा किया था कि मसूद अजहर उसके देश में मौजूद नहीं है और वह अफगानिस्तान भाग गया है। उसी साल FIA ने अपनी रेड बुक में उसे भगोड़ा घोषित कर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम रखा था। 

अब नई रेड बुक में उसका नाम फिर शामिल किया गया है और इनाम बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया गया है। हालांकि, मसूद अजहर के मौजूदा ठिकाने को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में परिवार के सदस्यों की मौत

22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बहावलपुर में हुई कार्रवाई में मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्यों की मौत हुई थी। 

इनमें उसकी बड़ी बहन और उसका पति, भतीजा और उसकी पत्नी, एक भतीजी और उसके पांच बच्चे शामिल बताए गए। इसके अलावा उसके चार सहयोगियों के मारे जाने की भी जानकारी सामने आई थी। हमले के समय मसूद अजहर वहां मौजूद नहीं था, इसलिए वह बच गया।

परिवार की मौत के बाद अजहर का बयान

रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार के सदस्यों की मौत के बाद मसूद अजहर ने एक बयान जारी किया था। इसमें उसने कहा था कि अगर वह भी मारा जाता तो वह उसके लिए सौभाग्य की बात होती।