रीवा का Sanjay Gandhi Hospital फिर चर्चा में! जिन्दा व्यक्ति का कर दिया पोस्टमार्टम

Sanjay Gandhi Hospital : रिकॉर्ड के मुताबिक, गिरिजा प्रसाद को 4 सितंबर 2026 को संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके अगले दिन 5 सितंबर 2026 को उनकी मौत दर्ज की गई।

रीवा का Sanjay Gandhi Hospital फिर चर्चा में! जिन्दा व्यक्ति का कर दिया पोस्टमार्टम

Sanjay Gandhi Hospital : रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय यानी SGMH की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार मामला इतना चौंकाने वाला है कि अस्पताल में जिस मरीज को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, उसे शव की तरह परिजनों को सौंप दिया गया और मर्चुरी तक पहुंचा दिया गया।

लेकिन पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही ऐसा खुलासा हुआ, जिसने सभी को हैरान कर दिया, जिसे अस्पताल ने मृत बताया था, वह जिंदा था। मामला सीधी निवासी करीब 66 वर्षीय गिरजा प्रसाद गुप्ता, पिता बुद्धिराम गुप्ता से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक मरीज को 4 सितंबर की रात करीब 11:25 बजे SGMH में भर्ती कराया गया था।

मरीज को मृत बताया, परिजनों से शव की रिसीविंग भी कराई

बताया जा रहा है कि गिरजा प्रसाद गुप्ता को जनरल मेडिसिन विभाग की चौथी मंजिल स्थित 4-B सेक्शन, बेड नंबर 33 पर भर्ती किया गया था। एडमिशन डॉक्टर के तौर पर डॉ. अनुराग चौरसिया का नाम सामने आ रहा है।

आरोप है कि इसके बाद मरीज को मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल की प्रक्रिया के तहत मरीज को शव बताते हुए परिजनों के हवाले किया गया और शव प्राप्त करने की रिसीविंग भी परिजनों से कराई गई।

मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि रिसीविंग पर्ची पर डॉ. निवेश सविता के हस्ताक्षर और सील होने की जानकारी सामने आई है। यानी अस्पताल के रिकॉर्ड और कागजी प्रक्रिया में मरीज को मृत माना जा चुका था।

मर्चुरी पहुंचने के बाद खुला राज

मरीज को मर्चुरी पहुंचाए जाने के बाद परिजन पोस्टमार्टम की तैयारी में जुटे थे। इसी दौरान पता चला कि जिसे मृत घोषित किया गया था, वह व्यक्ति जीवित है। इसके बाद मरीज को मर्चुरी से वापस लाकर दोबारा वार्ड में भर्ती कराया गया। अब इस पूरे मामले ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मरीज की मौत की पुष्टि किस आधार पर की गई?

क्या मृत्यु घोषित करने से पहले सभी जरूरी चिकित्सकीय जांच की गई थी?
मरीज को मृत घोषित करने की जिम्मेदारी किस डॉक्टर की थी? और सबसे बड़ा सवाल जिंदा मरीज मर्चुरी तक पहुंचा कैसे?

चमत्कार या सिस्टम की गंभीर चूक?

यह घटना महज एक मेडिकल गलती है या अस्पताल की व्यवस्था में गंभीर चूक- यह जांच के बाद ही साफ होगा। लेकिन अगर मरीज के जीवित होने की पुष्टि सही है, तो मामला बेहद गंभीर है।

गनीमत रही कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले मरीज के जीवित होने की जानकारी सामने आ गई। वरना स्थिति कितनी भयावह हो सकती थी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

कल्पना मिश्रा मामले के बाद SGMH फिर सवालों के घेरे में

SGMH में कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत का मामला अभी चर्चा में है। इसी बीच जिंदा मरीज को मृत घोषित किए जाने का कथित मामला सामने आने से अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। अब जरूरत है निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की।

जांच में यह सामने आना चाहिए कि मरीज को मृत किस आधार पर घोषित किया गया, मृत्यु की पुष्टि किसने की, शव मर्चुरी तक कैसे पहुंचा, परिजनों से रिसीविंग क्यों कराई गई और बाद में मरीज जीवित कैसे पाया गया। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारी तय होती है या फिर यह मामला भी अस्पताल की फाइलों में दबकर रह जाता है।