CBI का बड़ा एक्शन : सुभाष चंद्रा पर 1,322 करोड़ के फ्रॉड का केस, जानिए LIC Housing Finance से कैसे जुड़ा पूरा मामला
CBI ने Zee के संस्थापक सुभाष चंद्रा के खिलाफ LIC Housing Finance से जुड़े ₹1,322 करोड़ के कथित फ्रॉड मामले में FIR दर्ज की है।
नई दिल्ली: Essel Group के चेयरमैन और Zee के संस्थापक सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने सुभाष चंद्रा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ LIC Housing Finance Ltd. (LICHFL) से जुड़े करीब ₹1,322 करोड़ के कथित वित्तीय धोखाधड़ी मामले में FIR दर्ज की है। FIR 31 अगस्त 2026 को दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मामले को आसान भाषा में समझें तो सुभाष चंद्रा से जुड़ी कंपनियों ने LIC Housing Finance से करीब ₹980 करोड़ की दो बड़ी loan facilities ली थीं। बाद में दोनों loan accounts default हो गए। इसके बाद LIC Housing Finance की शिकायत में loan लेने के दौरान कथित तौर पर गलत या बढ़ा-चढ़ाकर दी गई financial information और documents का मुद्दा उठाया गया। इसी शिकायत के आधार पर CBI ने criminal case दर्ज किया है।
LIC Housing Finance ने दिया था करीब ₹980 करोड़ का Loan
CBI के मामले में दो प्रमुख loan facilities का जिक्र है। पहली करीब ₹500 करोड़ की facility मार्च 2018 में Vasant Sagar Properties Pvt. Ltd. और Pan India Infraprojects Pvt. Ltd. से जुड़ी थी। इस loan के लिए सुभाष चंद्रा की personal guarantee बताई गई है।
इसके बाद अगस्त 2018 में करीब ₹480 करोड़ की दूसरी facility Digital Subscriber Management and Consultancy Services Pvt. Ltd. और Spirit Infrapower and Multiventures Pvt. Ltd. को दी गई। इसमें भी सुभाष चंद्रा की personal guarantee थी। इस तरह दोनों facilities की मूल राशि करीब ₹980 करोड़ थी।
₹980 करोड़ के Loan से ₹1,322 करोड़ का मामला कैसे बना?
यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है। ₹980 करोड़ मूल loan facilities की राशि थी, जबकि ₹1,322.39 करोड़ LIC Housing Finance का admitted claim बताया गया है। यानी दोनों आंकड़े अलग-अलग हैं।
LIC Housing Finance के अनुसार, दोनों loan facilities बाद में default हो गईं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक Vasant Sagar वाली facility में outstanding करीब ₹570.50 करोड़, जबकि Digital वाली facility में करीब ₹507.25 करोड़ बताई गई थी।
इसके अलावा कुल बकाया/दावे और संबंधित देनदारियों के आधार पर LIC Housing Finance का admitted claim करीब ₹1,322.39 करोड़ बताया गया है इसलिए इसे केवल “₹1,322 करोड़ का loan लिया गया था” कहना सही नहीं होगा। सही बात यह है कि मूल दो loan facilities करीब ₹980 करोड़ की थीं और बाद में LIC Housing Finance का claim करीब ₹1,322 करोड़ तक पहुंचा।
Net Worth Certificate बना CBI जांच का अहम आधार
मामले में सबसे अहम सवाल सुभाष चंद्र की बताई गई net worth को लेकर है। LIC Housing Finance की शिकायत के मुताबिक, loan sanction के दौरान सुभाष चंद्रा से जुड़े financial documents में उनकी net worth बहुत बड़ी रकम में दिखाई गई थी। एक certificate में 31 मार्च 2017 के लिए उनकी net worth करीब ₹59,113 करोड़ बताई गई थी।
दूसरे loan से जुड़े certificate में करीब ₹40,562 करोड़ की net worth का उल्लेख होने की बात सामने आई है। बाद में personal insolvency proceedings के दौरान सुभाष चंद्रा की ओर से कथित तौर पर अलग financial figures बताए गए।
LIC Housing Finance ने इसी अंतर पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि loan हासिल करने के लिए गलत या inflated net-worth documents का इस्तेमाल किया गया।
यही आरोप अब CBI की जांच का बड़ा हिस्सा है। हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि ये फिलहाल शिकायत और जांच में लगाए गए आरोप हैं, अदालत में साबित तथ्य नहीं।

