गुना जनसुनवाई में रो पड़ा पिता, डॉक्टर पर बच्चे के इलाज में लापरवाही का आरोप
गुना कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में राजेश अहिरवार ने डॉक्टर पर इलाज में कथित लापरवाही से बच्चे का हाथ गंभीर रूप से प्रभावित होने का आरोप लगाया। पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
गुना/आरोन। गुना जिला कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक पिता अपने बच्चे को लेकर अधिकारियों के सामने पहुंचा और न्याय की गुहार लगाते हुए फूट-फूटकर रो पड़ा। पीड़ित राजेश अहिरवार ने एक सरकारी चिकित्सक पर इलाज में कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए दावा किया कि उपचार के बाद उसके बच्चे के हाथ की हालत गंभीर हो गई। परिवार का कहना है कि इस मामले को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
राजेश अहिरवार ने जनसुनवाई में अधिकारियों को आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित पिता ने आरोप लगाया कि वह अपने बच्चे का इलाज कराने डॉ. महेश राजपूत के निजी क्लीनिक पर गया था। वहां कथित तौर पर उससे 150 रुपये परामर्श शुल्क लिया गया और करीब 1,200 रुपये की दवाइयां भी दिलाई गईं।
इंजेक्शन के बाद हाथ की हालत बिगड़ने का आरोप
शिकायतकर्ता का दावा है कि बच्चे की आवश्यक जांच किए बिना उसे इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद बच्चे के हाथ की स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। राजेश का आरोप है कि कथित रूप से गलत उपचार या लापरवाही के कारण बच्चे के हाथ को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
जनसुनवाई के दौरान बच्चे की स्थिति बताते हुए पिता भावुक हो गया। उसका कहना है कि वह अपने बच्चे को बेहतर इलाज और न्याय दिलाने के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक उसे कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला।
कई बार शिकायत करने का दावा
राजेश अहिरवार का कहना है कि वह इस मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से कई बार कर चुका है। इसके बावजूद, उसके अनुसार, अब तक ऐसी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है जिससे परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद बंध सके।
पीड़ित परिवार ने मांग की है कि बच्चे के उपचार से जुड़े सभी दस्तावेजों और परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि बच्चे के हाथ की स्थिति बिगड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या है और उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
सरकारी डॉक्टर के निजी क्लीनिक को लेकर भी लगाए आरोप
शिकायतकर्ता ने संबंधित डॉक्टर को लेकर कुछ अन्य गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उसका दावा है कि सरकारी अस्पताल में पदस्थ होने के बावजूद डॉक्टर निजी क्लीनिक में मरीज देखते हैं और कथित तौर पर कुछ मरीजों को सरकारी अस्पताल के बजाय निजी क्लीनिक पर उपचार के लिए बुलाया जाता है।
हालांकि, शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अधिकारियों को वीडियो देने का भी दावा
राजेश अहिरवार ने यह भी दावा किया है कि उसने संबंधित अधिकारियों को एक वीडियो उपलब्ध कराया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, वीडियो में डॉक्टर कथित तौर पर बच्चे के इलाज से जुड़ी बात करते दिखाई देते हैं। हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता, पूरा संदर्भ और उसमें किए गए कथित दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जांच की स्थिति को लेकर उठ रहे सवाल
मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि पीड़ित परिवार पहले भी कई बार शिकायत दे चुका है, तो उन शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? क्या मामले में किसी तरह की विभागीय या चिकित्सकीय जांच शुरू की गई है? यदि जांच चल रही है तो उसकी मौजूदा स्थिति क्या है और शिकायतकर्ता को अब तक क्या जवाब दिया गया है?
इन सवालों का जवाब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक जांच तथा संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर बच्चे को उचित उपचार और न्याय दिलाने की मांग की है।
Anubhav Dubey 
