67% लोग निभा रहे हैं फेक दोस्ती! रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, जानिए सच्चे दोस्त की पहचान
आपके पास एक बड़ा फ्रेंड सर्किल है—ऑनलाइन व्हाट्सऐप ग्रुप्स, फेसबुक-इंस्टाग्राम फ्रेंड्स, कॉलेज का अलग ग्रुप, ऑफिस का, स्कूल के दोस्तों का और कुछ फैमिली फ्रेंड्स या बचपन के दोस्त, जिनके साथ आप रोज़ डांस क्लास जाते होंगे। लेकिन इनमें से आपका बेस्ट फ्रेंड या कोई ऐसा दोस्त है, जिसे आप ज़रूरत के समय याद कर सकें और वह बिना किसी देर के आपकी मदद कर सके?
शायद ही ऐसा कोई हो जो आपकी प्रॉब्लम के समय आपके साथ हो। और शायद यही वजह है कि लोग अच्छे फ्रेंड की तलाश कर रहे हैं। अब तो फेक फ्रेंडशिप को लेकर एक रिपोर्ट भी आ गई है। एक सर्वे के मुताबिक करीब 67% लोग ऐसी दोस्तियां निभा रहे हैं, जिनमें न तो कोई अपनापन है और न ही सच्ची दोस्ती। साथ ही 54% लोग ऐसे हैं जिन्होंने स्वीकार किया है कि उनकी कई दोस्तियां सिर्फ शिकायत करने, ऑफिस की बातें, फैमिली स्ट्रेस या किसी की बुराई करने पर ही टिकी हैं।

इस तरह की दोस्तियां सिर्फ पुरानी यादों की वजह से लोग जबरदस्ती खींच रहे हैं। उन्हें लगता है कि अगर वे अपनी शिकायतें नहीं बताएंगे तो उनका मन हल्का नहीं होगा और वे अपनी ज़िंदगी का एक पल खो देंगे। इसलिए वे इस तरह की दोस्ती में खुशी ढूंढकर रह रहे हैं। जबकि सच तो यह है कि इस तरह की दोस्ती न तो मज़बूत होती है और न ही सच्ची।

ज्यादा दोस्त, कम अपनापन
स्टडी की मानें तो जैसे-जैसे दोस्तों की संख्या बढ़ती है, उनमें जुड़ाव और अपनापन कम होने लगता है। सिर्फ चुगली या नेगेटिव बातों पर टिकी दोस्ती मेंटल हेल्थ के लिए भी सही नहीं होती। अक्सर देखा जाता है कि जब दो लोग किसी एक ही आदमी को नापसंद करते हैं, तो दोनों दोस्त बन जाते हैं। उनकी दोस्ती ही किसी दूसरे की बुराई पर टिकी होती है। लेकिन इस तरह की दोस्ती ज़्यादा दिन नहीं चल पाती।

कौन हैं सच्चे दोस्त ?
सच्चे दोस्त वो नहीं होते जिनसे आपकी रोज़ बातें हों, या जिनसे आप सिर्फ मतलब के लिए बात करते हों। दोस्ती वह होती है जिसमें आप कोई भी बात बिना किसी डर या जजमेंट के शेयर कर सकें। जो आपकी अच्छाइयों के साथ-साथ आपकी गलतियों को भी सुधारे। जिसके साथ आप किसी मतलब से नहीं, बल्कि इसलिए रहें क्योंकि वह इंसान आपके लिए अच्छा है और आपको समझता है।

