MP छात्रसंघ चुनाव में JAYAS की एंट्री, ABVP-NSUI को मिलेगी चुनौती
मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव में मुकाबला होगा त्रिकोणीय, ABVP-NSUI के सामने JAYAS, सभी कॉलेजों में उम्मीदवार उतारने की तैयारी, आदिवासी युवाओं को मिलेगा मौका
मध्यप्रदेश में करीब 9 साल बाद छात्रसंघ चुनाव की आहट के बीच छात्र राजनीति का मुकाबला दिलचस्प होता नजर आ रहा है। अब तक कॉलेजों में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के बीच रहा है। इस बार जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYAS) भी सीधे छात्रसंघ चुनाव के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है।

JAYAS ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। संगठन की ओर से खास तौर पर आदिवासी विद्यार्थियों के बीच संपर्क बढ़ाने और उन्हें उम्मीदवार बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। इससे आदिवासी बहुल क्षेत्रों के कॉलेजों में चुनावी समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।
High Court के आदेश के बाद चुनाव की उम्मीद
मध्यप्रदेश में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। हाल ही में Jabalpur High Court में एक छात्र की याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रदेश के शासकीय और निजी महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने को लेकर प्रदेश सरकार को निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, Higher Education Department की ओर से अभी तक चुनाव कार्यक्रम और अंतिम तारीख जारी नहीं की गई है। चुनाव की संभावित प्रक्रिया को लेकर ABVP और NSUI ने भी अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी बीच JAYAS ने भी प्रदेश के सभी कॉलेजों में उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है।

JAYAS ने बताया छात्र राजनीति में बड़ा मौका
JAYAS के राष्ट्रीय अध्यक्ष Lokesh Mujalda का कहना है कि मध्यप्रदेश में करीब नौ वर्षों से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि JAYAS के बढ़ते प्रभाव के कारण छात्र राजनीति में चुनाव बंद किए गए थे। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई आधिकारिक आधार पेश नहीं किया।

लोकेश सिंह मुजालदा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, जय आदिवासी युवा शक्ति जयस
Lokesh Mujalda ने कहा कि High Court के हस्तक्षेप के बाद अब छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ हुआ है। JAYAS इसे छात्र राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने के अवसर के रूप में देख रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक कॉलेजों में ABVP और NSUI का प्रभाव रहा है, लेकिन इस बार स्थिति अलग होगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों से चुनाव की तैयारियों में जुटने की अपील की है। संगठन का कहना है कि इस बार छात्र राजनीति में JAYAS नई ताकत के रूप में सामने आएगा।
Malwa-Nimar से शुरू होगा संपर्क अभियान
JAYAS छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष Babulal Baghel ने बताया कि संगठन पूरे प्रदेश के कॉलेजों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए जल्द ही कॉलेज स्तर पर विद्यार्थियों से संपर्क अभियान शुरू किया जाएगा।
सबसे पहले Malwa और Nimar क्षेत्र के कॉलेजों पर फोकस किया जाएगा। इन क्षेत्रों में आदिवासी विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है। संगठन के पदाधिकारी कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों से सीधे संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं की जानकारी लेंगे। इसके बाद प्रदेश के दूसरे जिलों में भी अभियान चलाया जाएगा।

Babulal Baghel ने कहा कि JAYAS उन सभी कॉलेजों तक पहुंचने की कोशिश करेगा, जहां आदिवासी समाज के विद्यार्थी बड़ी संख्या में पढ़ रहे हैं। संगठन का लक्ष्य अधिक से अधिक विद्यार्थियों को अपने साथ जोड़ना है।
आदिवासी विद्यार्थियों के मुद्दे रहेंगे केंद्र में
JAYAS की चुनावी रणनीति में आदिवासी विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को प्रमुख स्थान दिया जाएगा। छात्रवृत्ति, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, बैकलॉग पदों की भर्ती और कॉलेजों की स्थानीय समस्याओं को चुनाव अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा।

JAYAS पहले भी युवाओं से जुड़े इन मुद्दों को लेकर आंदोलन और प्रदर्शन करता रहा है। संगठन बैकलॉग पदों पर भर्ती और पटवारी परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग खत्म करने जैसे मुद्दे उठा चुका है। अब इन्हीं मुद्दों को कॉलेजों के विद्यार्थियों तक पहुंचाने की तैयारी है।
ABVP-NSUI के सामने पहली बार चुनौती
मध्यप्रदेश की कॉलेज राजनीति में ABVP और NSUI लंबे समय से सक्रिय हैं। छात्रसंघ चुनाव इन दोनों संगठनों के लिए छात्र नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम रहे हैं। अब JAYAS की सीधी एंट्री से मुकाबले में तीसरा प्रमुख संगठन सामने आ गया है।

इसका सबसे ज्यादा असर उन कॉलेजों में देखने को मिल सकता है, जहां आदिवासी विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है। अभी तक इन विद्यार्थियों को अपने साथ जोड़ने के लिए ABVP और NSUI के बीच मुकाबला रहता था। JAYAS के मैदान में आने के बाद दोनों संगठनों के सामने आदिवासी विद्यार्थियों के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने की नई चुनौती होगी।
साल 2013 में हुआ था JAYAS का गठन
जय आदिवासी युवा शक्ति यानी JAYAS का गठन वर्ष 2013 में हुआ था। संगठन लंबे समय से आदिवासी समाज और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहा है। करीब दो साल पहले JAYAS ने छात्र राजनीति के लिए अपना अलग छात्र संगठन भी तैयार किया था।

अब छात्रसंघ चुनाव के जरिए संगठन कॉलेजों में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल प्रदेश सरकार की ओर से चुनाव की अंतिम तारीख का ऐलान नहीं हुआ है। चुनाव सितंबर में होने की चर्चा है, लेकिन आधिकारिक कार्यक्रम जारी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
Varsha Shrivastava 
