22.84 लाख की रिकवरी 7 लाख कैसे हुई? मऊगंज की बेलहा पंचायत में बड़ा सवाल

मऊगंज की बेलहा ग्राम पंचायत में 22.84 लाख रुपये की कथित रिकवरी घटकर 6-7 लाख होने का आरोप। ग्रामीणों ने रीवा कमिश्नर से उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

22.84 लाख की रिकवरी 7 लाख कैसे हुई? मऊगंज की बेलहा पंचायत में बड़ा सवाल

रिपोर्ट: राजेंद्र पयासी, मऊगंज

मऊगंज। जिले की जनपद पंचायत हनुमना अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलहा में सरकारी राशि की रिकवरी से जुड़ा मामला सवालों के घेरे में है। आरोप है कि जांच के बाद करीब 22 लाख 84 हजार रुपये की रिकवरी तय की गई थी, लेकिन बाद में यह राशि घटकर करीब 6 से 7 लाख रुपये रह गई और प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया गया।

ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत में कुछ निर्माण कार्य अधूरे थे, लेकिन दस्तावेजों में उन्हें पूरा मान लिया गया। इसी आधार पर रिकवरी की राशि कम किए जाने का दावा किया जा रहा है। अब सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी राशि में बदलाव किस आधार पर किया गया और क्या इसके पहले मौके पर तकनीकी एवं भौतिक सत्यापन कराया गया था?

22.84 लाख से 6-7 लाख तक कैसे पहुंची रिकवरी?

मामले में सबसे बड़ा सवाल रिकवरी की राशि में कथित रूप से आई बड़ी कमी को लेकर है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब प्रारंभिक जांच के बाद 22 लाख 84 हजार रुपये की वसूली तय हुई थी, तो बाद में यह राशि करीब एक तिहाई कैसे रह गई?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधूरे निर्माण कार्यों को दस्तावेजों में पूरा दिखाकर रिकवरी कम की गई। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।

रिकवरी प्रक्रिया पर उठे सवाल

पंचायतों में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और उससे जुड़ी वसूली की कार्रवाई के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। बेलहा ग्राम पंचायत के इस मामले में शिकायतकर्ताओं ने धारा 40/92 से जुड़े प्रकरण और रिकवरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी धन से स्वीकृत सड़क, तालाब, भवन या अन्य निर्माण कार्य अधूरे रहते हैं, तो उनकी वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी है। उनका सवाल है कि यदि काम अधूरा था, तो उसे पूरा किस आधार पर माना गया और रिकवरी की राशि किस आदेश के तहत कम की गई?

रीवा कमिश्नर कार्यालय में शिकायत

मामले को लेकर ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने रीवा कमिश्नर कार्यालय में शिकायत की है। मांग की गई है कि पिछले 5 से 10 वर्षों के दौरान धारा 40/92 से जुड़े नस्तीबद्ध प्रकरणों की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच कराई जाए।

शिकायतकर्ताओं की मांग है कि जांच में यह भी देखा जाए कि किन मामलों में तकनीकी प्रतिवेदन या भौतिक सत्यापन के आधार पर रिकवरी राशि में बदलाव किया गया और संबंधित आदेश किस अधिकारी ने जारी किए।

दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या गलत तरीके से रिकवरी कम किए जाने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। साथ ही नियमानुसार शेष राशि की वसूली की कार्रवाई भी की जाए।

फिलहाल इस मामले में प्रशासन या संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। संबंधित पक्ष का बयान मिलने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

बेलहा ग्राम पंचायत का यह मामला अब केवल एक रिकवरी तक सीमित नहीं रह गया है। शिकायतकर्ताओं ने पंचायतों में सरकारी धन की वसूली से जुड़ी पुरानी फाइलों की जांच की मांग उठाकर पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।