MP के 1.5 लाख शिक्षकों को देना होगा TET एग्जाम, सुप्रीम कोर्ट ने 2028 तक बढ़ाई समय-सीमा

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: मध्यप्रदेश के डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों को TET परीक्षा पास करना अनिवार्य। राहत ये है कि पात्रता परीक्षा पास करने की समय-सीमा 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी गई है।

MP के 1.5 लाख शिक्षकों को देना होगा TET एग्जाम, सुप्रीम कोर्ट ने 2028 तक बढ़ाई समय-सीमा

मध्यप्रदेश के करीब 1.5 लाख से अधिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अब अनिवार्य कर दी गई है। Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों का TET पास होना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नियम केवल नए भर्ती शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि पहले से कार्यरत (In-service) शिक्षकों पर भी लागू होगा।

समय-सीमा 2 साल से बढ़ाकर 3 साल की गई

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले दिए गए आदेश में शिक्षकों को TET पास करने के लिए 2 साल का समय दिया था, लेकिन अब समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई के बाद इसे बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है। नए आदेश के अनुसार शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET पास करना होगा।

यह फैसला अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट मामले से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने दोहराया कि शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए योग्य शिक्षकों का होना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि बच्चों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए पात्रता परीक्षा को अनिवार्य रखना जरूरी है।

फैसले के बाद मध्यप्रदेश के शिक्षक संगठनों में असंतोष

इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश के शिक्षक संगठनों में असंतोष देखा जा रहा है। कई संगठनों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई परीक्षा की अनिवार्यता थोपना अनुचित है। ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन और अन्य संगठनों ने इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है और आगे कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है।

वहीं, सरकार और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अब देखना होगा कि शिक्षक संगठन और सरकार इस फैसले को लागू करने के लिए किस तरह आगे बढ़ते हैं और क्या भविष्य में इसमें कोई संशोधन होता है या नहीं।