मऊगंज में मानसून की बेरुखी किसान बेहाल पिछले साल की तुलना में 84 प्रतिशत कम बारिश
मऊगंज में मानसून की बेरुखी, किसान बेहाल पिछले साल की तुलना में 84 प्रतिशत कम बारिश, खेत सूखे, धान की रोपनी अधर में
राजेंद्र पयासी मऊगंज: जिले में मानसून की सुस्त चाल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। 1 जून से अब तक जिले में केवल 56.9 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 363.4 मिलीमीटर बारिश हो चुकी थी। इस साल अब तक 84 प्रतिशत कम बारिश होने से खरीफ सीजन पर संकट गहराने लगा है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार तहसील मऊगंज में 48.6 मिमी, हनुमना में 64 मिमी तथा नईगढ़ी में 58 मिमी वर्षा दर्ज की गई। 2 जुलाई को हनुमना में 20 मिमी और नईगढ़ी में 44 मिमी बारिश हुई, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रही है।

बारिश की कमी का सीधा असर किसानों की खेती पर दिख रहा है। जिले के ज्यादातर खेत अभी भी सूखे पड़े हैं। मोटे अनाज की बोनी तक नहीं हो पाई है। जिन किसानों के पास सिंचाई का साधन है वहां धान की नर्सरी तैयार है मगर खेतों में पानी न होने से रोपनी शुरू नहीं हो पा रही। वही अधिकतर किसान प्रकृति कि आस लिए अभी भी बैठे हैं कि बारिश होगी तो धान की नर्सरी डालेंगे, लेकिन बारिश न होने से चिंतित किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। जिले के डिहिया गांव निवासी किसान अनूप सिंह बताया कि जुलाई माह का पहला सप्ताह चल रहा है पर खेत में हल, ट्रैक्टर नहीं चला। अगर अगले 10 दिन में अच्छी बारिश न हुई तो धान की फसल लेना मुश्किल हो जाएगा। कई किसानों ने महंगे दाम पर डीजल लेकर ट्यूबवेल से सिंचाई की कोशिश की, लेकिन भूजल स्तर नीचे होने से वह भी कारगर नहीं है।

कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि किसान कम पानी वाली फसलों जैसे अरहर, उड़द या तिल की ओर रुख करें। साथ ही धान की श्री पद्धति अपनाएं जिसमें कम पानी लगता है। लेकिन समस्या यह है कि इतनी भी बारिश नहीं हो पाई की फसल की बनी की जा सके। वर्तमान जो हालात है जिले में अल्प वर्षा का यह दौर जारी रहा तो अन्नदाताओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। किसान प्रकृति की इस मार से खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं और प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए हैं।

