जबलपुर से भोपाल को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-45 पर ब्रिज का बड़ा हिस्सा गिरा

शहपुरा के पास रेलवे पर बना ओवर ब्रिज का बड़ा हिस्सा रविवार शाम धंस गया। PWD मंत्री राकेश सिंह ने कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया।

जबलपुर से भोपाल को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-45 पर ब्रिज का बड़ा हिस्सा गिरा
Shahpura Railway Over Bridge Collapse

जबलपुर से भोपाल को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-45 पर शहपुरा के समीप रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर बना ब्रिज का एक बड़ा हिस्सा धंस गया, जिसके बाद रास्ते को बंद कर दिया गया। 400 करोड़ की लागत से इस ब्रिज का निर्माण 3 साल पहले ही हुआ था। इसी ब्रिज का एक तरफ का हिस्सा दिसंबर में भी टूटा था। तब से आवागमन एक लेन से हो रहा था। मामला सामने आने के बाद PWD मंत्री राकेश सिंह ने कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया है। 

NH-45 पर भरभराकर गिरा ब्रिज का हिस्सा

जबलपुरभोपाल को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-45 पर रविवार शाम बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब शहपुरा के समीप रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर बना ओवरब्रिज का एक हिस्सा अचानक धंस गया। घटना शाम करीब 5 बजे की बताई जा रही है। ब्रिज के धंसते ही प्रशासन ने तुरंत मार्ग को बंद कर दिया और यातायात को डायवर्ट कर दिया गया। इस घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

मार्ग बंद होने के बाद हल्के वाहनों को शहपुरा बस्ती के अंदरूनी रास्तों से डायवर्ट किया गया है, जबकि भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। जबलपुर–भोपाल के बीच सीधा संपर्क बाधित होने से यात्रियों और ट्रांसपोर्टरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ब्रिज के नीचे लगभग 50 मीटर के दायरे में रेलवे ट्रैक गुजरता है। जिस स्थान पर धंसाव हुआ, वह रेलवे लाइन के ठीक ऊपर का हिस्सा है। यदि यह भाग सीधे रेलवे ट्रैक पर गिर जाता या उस समय कोई ट्रेन वहां से गुजर रही होती, तो बड़ा रेल हादसा हो सकता था।

PWD मंत्री ने कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया

जबलपुर हादसे में PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि किसी को छोड़ नहीं जाएगा। ऐसे मामले ना बढ़े इसके लिए उचित कार्रवाई करेंगे। जिसकी निगरानी में जिस इंजीनियर की वो डीएम के लेवल का होगा या किसी और स्तर का होगा जो भी होगा उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी और ठेकेदार पर FIR भी दर्ज कराई जाएगी। वहीं, PWD मंत्री राकेश सिंह ने बांगड़ कंपनी जो इस नेशनल हाईवे और ओवरब्रिज का निर्माण कर रही थी उसको ब्लैक लिस्टेड कर दिया है। लेकिन क्षतिग्रस्त हिस्सा कंपनी ही बनाकर देगी। 

इस मामले में जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हुई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के जबलपुर प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने बताया कि संबंधित सड़क खंड उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उनके अनुसार, इस हिस्से का निर्माण और रखरखाव मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) के अधीन है। इसलिए NHAI इस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं है।

ब्रिज का एक तरफ का हिस्सा दिसंबर में टूटा था

इसी ओवरब्रिज की एक लेन दिसंबर महीने में क्षतिग्रस्त हो गई थी। उस समय ब्रिज में दरारें आने के बाद एक लेन को पूरी तरह बंद कर दिया गया था और दूसरी लेन से ही आवागमन संचालित किया जा रहा था। बंद लेन पर निर्माण एजेंसी द्वारा मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य जारी था। इसी दौरान निर्माणाधीन हिस्से के पास ब्रिज का एक अन्य भाग धंस गया, जिससे सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने पूरे मार्ग पर यातायात रोक दिया।

करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बने इस ओवरब्रिज का निर्माण लगभग तीन वर्ष पहले ही पूरा हुआ था। इतनी कम अवधि में ब्रिज में आई गंभीर तकनीकी खामियों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिसंबर में दरारें आने के बाद भी स्थायी समाधान नहीं किया गया, बल्कि अस्थायी मरम्मत कर यातायात चालू रखा गया।