बांग्लादेश में ‘ट्रम्प भैंसे’ की कुर्बानी रुकी, अब नेशनल जू में रखेगी सरकार
बांग्लादेश में डोनाल्ड ट्रम्प की हेयरस्टाइल जैसे सुनहरे बालों वाला 700 किलो का सफेद भैंसा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के लिए खरीदे गए इस दुर्लभ ‘ट्रम्प भैंसे’ की कुर्बानी सरकार ने रुकवा दी और अब उसे ढाका नेशनल जू भेज दिया गया है।
बांग्लादेश में सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक चर्चा का विषय बने 'डोनाल्ड ट्रम्प' नाम के एक अनोखे सफेद भैंसे की ईद-उल-अजहा पर होने वाली कुर्बानी को सरकार ने रोक दिया है। 700 किलोग्राम वजनी इस दुर्लभ भैंसे को एक शख्स ने करीब 3 लाख रुपये (3.85 लाख टका) में कुर्बानी के लिए खरीदा था। लेकिन जानवर की बढ़ती लोकप्रियता और उसकी दुर्लभता को देखते हुए बांग्लादेश के गृह मंत्रालय ने हस्तक्षेप कर इसकी कुर्बानी पर रोक लगा दी है। अब इस भैंसे को ताउम्र सुरक्षा के साथ ढाका के नेशनल जू (चिड़ियाघर) में रखा जाएगा।
क्यों पड़ा इसका नाम 'डोनाल्ड ट्रम्प'..
इस भैंसे की सबसे बड़ी खासियत इसके सिर पर मौजूद सुनहरे बालों का गुच्छा है। यह हेयरस्टाइल काफी हद तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बालों से मेल खाती है। इसी अनोखे लुक की वजह से लोगों ने इसका नाम 'ट्रम्प' रख दिया था। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और रील्स के जरिए यह भैंसा पूरी दुनिया में वायरल हो गया और लोग दूर-दूर से इसे देखने नारायणगंज के रबेया एग्रो फार्म पहुंचने लगे।

खरीदार को वापस मिलेंगे पूरे पैसे, जू में मिली वीआईपी एंट्री..
भैंसे को जिंजिरा के रहने वाले मोहम्मद शोरोन ने 23 मई को खरीदा था। गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि खरीदार को उसकी पूरी रकम (3.85 लाख टका) वापस की जाए ताकि उसे कोई आर्थिक नुकसान न हो। 4 साल के इस भैंसे को अब 'बांग्लादेश नेशनल जू' शिफ्ट कर दिया गया है। जू के क्यूरेटर अतीकुर रहमान ने बताया:
- भैंसे के लिए चिड़ियाघर में एक अलग और विशेष बाड़ा तैयार किया गया है।
- उसकी देखरेख के लिए खास कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
फिलहाल उसे दो हफ्ते के लिए क्वारंटीन और निगरानी में रखा गया है, जिसके बाद इसे आम जनता के देखने के लिए खोल दिया जाएगा।

बांग्लादेश में बेहद दुर्लभ है यह नस्ल..
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह भैंसा एल्बिनो (Albino) नस्ल का है, जो बांग्लादेश में बेहद दुर्लभ माना जाता है क्योंकि वहां आमतौर पर सिर्फ काले भैंसे ही पाए जाते हैं।

क्या होती है एल्बिनो नस्ल..
हजारों सामान्य पशुओं में से किसी एक में यह जेनेटिक बदलाव देखने को मिलता है। इन जानवरों के शरीर में 'मेलेनिन' (Melanin) नाम का पिगमेंट नहीं बनता, जो त्वचा, बाल और आंखों को रंग देता है। इसी वजह से इनका रंग सफेद या हल्का गुलाबी होता है। इन जानवरों की त्वचा धूप और इन्फेक्शन के प्रति काफी संवेदनशील होती है, इसलिए इन्हें खास केयर की जरूरत होती है। चूंकि यह भैंसा अभी सिर्फ 4 साल का है, इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि जू में बेहतर देखभाल के साथ यह कई सालों तक जीवित रह सकता है।

