Ganesh Chaturthi 2026 : इस शुभ मुहूर्त में करें गणपति की स्थापना, जानिए पूरी पूजा विधि और सामग्री
Ganesh Chaturthi 2026 : गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की विधि-विधान से स्थापना और पूजा का विशेष महत्व है। अगर इस साल आप भी अपने घर बप्पा की स्थापना करने वाले है तो यहां देखिये शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Ganesh Chaturthi 2026 : लाइफस्टाइल डेस्क। भगवान गणेश को हिंदू धर्म में प्रथम पूजनीय माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है। विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार शुरू करने या नया बहीखाता खोलने से पहले उनकी पूजा की जाती है। उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। मान्यता है कि गणेश जी भक्तों के जीवन से बाधाएं दूर करते हैं। गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश कुछ दिनों के लिए घरों और सार्वजनिक पंडालों में विराजमान होते हैं। इस दौरान भक्त श्रद्धा और विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं।
कब मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी
साल 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। यह पर्व महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना और गुजरात सहित देश के कई राज्यों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों और पंडालों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है। भक्त पूजा, आरती और भोग के जरिए गणपति की आराधना करते हैं। पर्व के अंतिम चरण में गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।
इस समय मूर्ति स्थापना का है विशेष महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। आमतौर पर कई व्रत और धार्मिक अनुष्ठान सूर्योदय के समय किए जाते हैं। गणेश स्थापना के लिए दोपहर का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का जन्म दोपहर के समय हुआ था। इसलिए इसी अवधि में उनकी प्रतिमा स्थापित करना शुभ माना जाता है।
गणेश चतुर्थी 2026 की तिथि और मुहूर्त
गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को है। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 15 सितंबर की सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। नई दिल्ली में गणेश स्थापना का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। मुंबई में यह समय सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 1 बजकर 48 मिनट तक है। पुणे में स्थापना का समय सुबह 11 बजकर 16 मिनट से दोपहर 1 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। कोलकाता में यह मुहूर्त सुबह 10 बजकर 18 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। मुख्य गणेश विसर्जन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को किया जाएगा।
साफ-सफाई से शुरू करें गणेश स्थापना
गणेश स्थापना के दिन सुबह स्नान करके साफ या नए कपड़े पहनें। पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। पूजा के दौरान पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है। चौकी पर स्वास्तिक बनाएं और उसके बीच अक्षत रखें। इसके बाद दाहिने हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर पूजा का संकल्प करें। संकल्प पूरा होने के बाद जल को छोड़ दें।
शुभ मुहूर्त में स्थापित करें गणपति की मूर्ति
शुभ समय में गणेश जी की मूर्ति को अक्षत के ऊपर स्थापित करें। मूर्ति पर गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें। गणेश जी के पास पानी से भरा तांबे का कलश रखें। कलश में सिक्का और सुपारी रखी जा सकती है। इसके ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें। इसके बाद भगवान गणेश को रोली, कुमकुम और चंदन का तिलक लगाएं।
दूर्वा और मोदक से करें गणपति का पूजन
गणेश जी को अक्षत, मौली, फूल और दूर्वा अर्पित करें। पूजा में 21 दूर्वा चढ़ाने की परंपरा है। लाल गुड़हल का फूल भी अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाएं। भोग में पंचमेवा, मिश्री और फल रखें।
भगवान गणेश को 21 मोदक या लड्डू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान गणेश चतुर्थी की कथा और स्यमंतक मणि की कथा का पाठ किया जा सकता है। अंत में श्रद्धा के साथ गणेश जी की आरती करें।
गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री की सूची
गणेश पूजा के लिए पहले से जरूरी सामग्री तैयार रखना बेहतर होता है। पूजा में गणेश जी की मूर्ति, गंगाजल और तांबे का कलश रखें। इसके अलावा रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत और मौली धागे की जरूरत होती है।
सुपारी, हल्दी की गांठ, पंचमेवा और मिश्री भी पूजा सामग्री में शामिल की जाती है। दीपक के लिए देसी घी और आरती के लिए कपूर रखा जा सकता है। पूजा के अंत में आरती की थाली और भोग की सामग्री का उपयोग किया जाता है।

