इंदौर में MOS टैक्स पर बवाल: चुनाव से पहले बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने, व्यापारियों का भी विरोध तेज
इंदौर में घरों के बाहर हवा-पानी यानी MOS पर लगाए जा रहे टैक्स को लेकर सियासत गरमाई। आने वाले समय में नगर निगम चुनाव है। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही इस वसूली का विरोध कर रहे हैं।
इंदौर में मकानों के आगे-पीछे छोड़ी जाने वाली खुली जगह यानी MOS (मार्जिनल ओपन स्पेस) पर लगाए जा रहे टैक्स को लेकर सियासत गरमा गई है। नगर निगम द्वारा इस टैक्स की वसूली शुरू होते ही शहर में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। खास बात यह है कि आगामी नगर निगम चुनाव को देखते हुए कोई भी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर जनता की नाराजगी मोल लेने को तैयार नहीं है। ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस टैक्स के विरोध में खड़े नजर आ रहे हैं।
दरअसल, नगर निगम ने एमओएस के तहत उन खुली जगहों पर टैक्स लगाने की प्रक्रिया शुरू की है, जो मकानों के निर्माण के दौरान नियमों के तहत खाली छोड़ी जाती हैं। निगम की टीम द्वारा जैसे ही घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस थमाए गए, इसका विरोध शुरू हो गया। लोगों का कहना है कि जिस जगह का कोई व्यावसायिक उपयोग नहीं हो रहा, उस पर टैक्स लगाना पूरी तरह अनुचित है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने पहले ही आंदोलन की चेतावनी दे दी है। वहीं अब व्यापारी वर्ग भी खुलकर मैदान में उतर आया है। व्यापारियों का तर्क है कि एमओएस के तहत छोड़ी गई जगहों का उपयोग न तो व्यावसायिक गतिविधियों के लिए होता है और न ही इससे कोई आय होती है, ऐसे में उस पर कर लगाना गलत है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर इस तरह का टैक्स लगाया जा रहा है, तो एयरपोर्ट जैसे बड़े संस्थानों से भी इस आधार पर शुल्क लिया जाना चाहिए, जहां रनवे और हैंगर का व्यावसायिक उपयोग होता है।

वहीं, इस पूरे मामले में नगर निगम की एमआईसी (मेयर इन काउंसिल) में शामिल बीजेपी पार्षद भी अब खुलकर विरोध में आ गए हैं। सत्ता पक्ष में होने के बावजूद पार्षदों ने अधिकारियों की इस वसूली प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस तरह के टैक्स से आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जो उचित नहीं है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो वे भी जनता के साथ मिलकर विरोध करेंगे। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री से चर्चा करने की बात कही है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय को निरस्त करने या उसमें संशोधन करने की मांग की जाएगी।

हालांकि, नगर निगम का पक्ष यह है कि एमओएस टैक्स कोई नया कर नहीं है, बल्कि यह पहले से तय नियमों और प्रावधानों के तहत ही लिया जा रहा है। निगम का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक है और इसका उद्देश्य राजस्व बढ़ाना है। फिलहाल, शहर में इस मुद्दे को लेकर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनावी माहौल में यह विवाद राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है। अब देखना होगा कि बढ़ते दबाव के बीच प्रशासन इस फैसले पर क्या रुख अपनाता है और क्या एमओएस टैक्स को लेकर कोई राहत मिलती है या नहीं।
Varsha Shrivastava 
