सतनाः क्रिस्टकुला स्कूल में 8 वर्षीय बच्चे का हाथ टूटने की घटना, स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप

क्रिस्टकुला मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल (पतेरी) में 8 वर्षीय बच्चे का हाथ टूटने की घटना सामने आई। बच्चे को स्कूल में चोट लगी, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय इसे दबाने की कोशिश की।

सतनाः क्रिस्टकुला स्कूल में 8 वर्षीय बच्चे का हाथ टूटने की घटना, स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप
Satna Christkula School

सतना। शहर के प्रतिष्ठित क्रिस्टकुला मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल (पतेरी) में 16 जनवरी शनिवार को करीब 2 बजे एक 8 वर्षीय बच्चे का हाथ टूटने की दर्दनाक घटना सामने आई। जानकारी के अनुसार, घटना के समय बच्चे को स्कूल में चोट लगी, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय इसे दबाने की कोशिश की।

बच्चे के परिजन जब छुट्टी के समय बच्चे को लेने पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि उसका हाथ बिल्कुल नहीं उठ रहा है और वह अत्यधिक दर्द में था। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन से घटना के बारे में पूछताछ की, लेकिन प्रबंधन ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और सुनने से भी इनकार कर दिया। जब परिजनों ने घटना के सीसीटीवी फुटेज दिखाने की मांग की, तो स्कूल ने इसे दिखाने से साफ मना कर दिया।

घटना के बाद परिजनों ने शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की, तो स्कूल प्रबंधन ने उन्हें दबाव डालकर शिकायत वापस लेने या दर्ज न कराने का प्रयास किया। इस पूरी स्थिति ने अभिभावकों में गहरी चिंता और नाराजगी पैदा कर दी है।

विशेष रूप से यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि कुछ ही दिन पहले सतना के ही सीएमए स्कूल (अमौधा/पतेरी क्षेत्र) में 6 वर्षीय यूकेजी छात्रा को होमवर्क न करने पर शिक्षक द्वारा थप्पड़ मारने से बच्ची का हाथ फ्रैक्चर हो गया था। उस मामले में सिविल लाइन थाना पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।

इन दोनों घटनाओं ने निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन के नाम पर होने वाली कठोरता को लेकर शहर में चिंता बढ़ा दी है। अभिभावक सवाल उठा रहे हैं कि क्या स्कूल केवल अपने नाम और प्रतिष्ठा की रक्षा में लगे हैं, या बच्चों की सुरक्षा को गंभीरता से लेते हैं।

अभिभावक और नागरिक प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि क्रिस्टकुला स्कूल में हुई घटना की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की जाए, सीसीटीवी फुटेज जब्त किए जाएं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। शहर में माता-पिता अब अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्क हो गए हैं और स्कूलों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग जोर पकड़ रही है।