दूषित पानी को लेकर उमंग सिंघार का सरकार पर हमला: बोले- जनता को साफ पानी देना सरकार की जिम्मेदारी
Indore News : भागीरथपुरा में दूषित पानी के मुद्दे को लेकर मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार और नगर निगम पर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया से चर्चा के दौरान सिंघार ने कहा कि इंदौर को लगातार स्वच्छता के लिए अवॉर्ड मिलते रहे हैं, लेकिन शहर की जनता को साफ पानी तक नहीं मिल पा रहा है।
Indore News : इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के मुद्दे को लेकर मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार और नगर निगम पर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया से चर्चा के दौरान सिंघार ने कहा कि इंदौर को लगातार स्वच्छता के लिए अवॉर्ड मिलते रहे हैं, लेकिन शहर की जनता को साफ पानी तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने दूषित पानी की जांच रिपोर्ट, नगर निगम की कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर कई सवाल उठाए।
भागीरथपुरा दूषित जल प्रकरण में प्रेस वार्ता, इंदौर!
— Umang Singhar (@UmangSinghar) October 2, 2026
इस दौरान पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा जी, इंदौर कांग्रेस जिलाध्यक्ष चिंटू चौकसेजी, प्रवक्ता निलाभ शुक्ला जी, अमित चौरसिया जी एवं सच सलूजा जी मौजूद रहे।@CMMadhyaPradesh @DrMohanYadav51 @KailashOnline @INCIndia @INCMP… pic.twitter.com/PxV2368okL
आखिर कहां से आ रहा दूषित पानी?
उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि नगर निगम अब तक यह पता क्यों नहीं लगा पाया कि शहर में दूषित पानी कहां से आ रहा है। उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा में दूषित पानी की समस्या को करीब आठ महीने बीत चुके हैं, इसके बावजूद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।

सिंघार ने मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि इंदौर की जनता के लिए उनके पास समय क्यों नहीं है। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम की जांच रिपोर्ट में शहर के कई अस्पतालों के पानी के साफ नहीं होने की बात सामने आई है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 नागरिकों को जीवन के अधिकार की गारंटी देता है और साफ पानी जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
बड़े बजट के बावजूद साफ पानी पर सवाल
उमंग सिंघार ने नगर निगम के करीब साढ़े आठ हजार करोड़ रुपये के बजट का हवाला देते हुए कहा कि इंदौर में महापौर, विधायक और प्रदेश में बीजेपी की सरकार होने के बावजूद लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता से वोट लेना चाहती है, लेकिन उन्हें साफ पानी उपलब्ध कराने में गंभीरता नहीं दिखा रही। सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा में पीने के पानी को लेकर सरकार की ओर से गलत जानकारी दी गई और जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से बचने की कोशिश की गई।
जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों को लेकर भी उठाए सवाल
सिंघार ने कहा कि जांच में दूषित पानी मिलने की बात सामने आई है, लेकिन पूरे प्रोजेक्ट के ब्लूप्रिंट तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में हुई जांच के दौरान जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए और जांच में पूरा सहयोग नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बावजूद सरकार अब तक यह तय नहीं कर पाई है कि दूषित पानी की घटना के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
जवाबदेही तय करने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई, लेकिन जनप्रतिनिधियों को बचाने की कोशिश की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ओवरहेड टैंक पर छह लोगों की तैनाती के बावजूद पोटेशियम क्लोराइड मिलाने वाले व्यक्ति से सख्ती से पूछताछ क्यों नहीं की गई। सिंघार ने महापौर के पास करीब 66 दिन तक फाइल रुके रहने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने संबंधित कंपनी के साथ कथित लेनदेन की जांच कराने की मांग की।
पीड़ितों के मुआवजे पर भी सवाल
उमंग सिंघार ने कहा कि दूषित पानी की घटना से प्रभावित लोगों को सरकार ने केवल नाममात्र का मुआवजा दिया है। उन्होंने बालाघाट और सागर में सामने आई घटनाओं का भी हवाला देते हुए इन मामलों में सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता को साफ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना सरकार और स्थानीय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
प्रेम की शक्ति दंड की शक्ति से हजार गुनी प्रभावशाली और स्थायी होती है।
— Umang Singhar (@UmangSinghar) October 2, 2026
- महात्मा गांधी#US12946 pic.twitter.com/moEQbcHkTv
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

