भोपाल में DPI मुख्यालय पर शिक्षकों का प्रदर्शन, TET परीक्षा रद्द करने की मांग
मध्य प्रदेश के शिक्षकों में भोपाल के लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मुख्यालय का घेराव किया। TET अनिवार्यता के आदेश का विरोध कर रहे शिक्षक संगठनों ने परीक्षा रद्द करने की मांग उठाई।
भोपाल। राजधानी में बुधवार को शिक्षक संगठनों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्यता के आदेश के खिलाफ एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। भोपाल में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मुख्यालय के बाहर शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए परीक्षा रद्द करने और पुराने शिक्षकों की सेवाओं को सुरक्षित करने की मांग उठाई। प्रदेशभर में शिक्षक संगठनों ने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों में भी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे।

अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के सदस्य उपेंद्र कौशल ने बताया कि राजधानी के साथ-साथ आसपास के जिलों से शिक्षक एकत्र होकर DPI मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के नाम पर जारी यह आदेश हजारों पुराने शिक्षकों की नौकरी के लिए खतरा बन गया है। प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि सरकार को टीईटी आदेश को निरस्त करना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए।
DPI भोपाल का आदेश और उसका असर
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) भोपाल द्वारा हाल ही में जारी आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय बचा है, उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर परीक्षा पास करनी होगी, अन्यथा उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया गया है।

हालांकि, शिक्षकों में इस आदेश को लेकर व्यापक असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि इस आदेश से प्रदेश के लगभग 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें लगभग 70 हजार शिक्षक 2011 से पहले नियुक्त हुए थे। ऐसे शिक्षक इस आदेश को “रेट्रोस्पेक्टिव” यानी पुराने मामलों पर नए नियम लागू करने वाला और अन्यायपूर्ण मान रहे हैं।
पुराने नियमों पर नई शर्तों का विरोध
शिक्षक संगठनों का तर्क है कि आरटीई एक्ट 2009 में लागू हुआ था और टीईटी 2011 से अनिवार्य किया गया। हजारों शिक्षक इससे पहले ही नियुक्त हो चुके थे। ऐसे में अब उन पर टीईटी लागू करना अनुचित और कानूनी रूप से कमजोर निर्णय माना जा रहा है। शिक्षकों का आरोप है कि इस आदेश से उनकी योग्यता और नौकरी पर अनावश्यक संकट खड़ा हो गया है।

शिक्षक संगठनों ने 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर आंदोलन और ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई है। इस दौरान सभी स्थानीय विधायक, मंत्री और सांसदों को शिक्षक संगठन ज्ञापन देंगे। यदि उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो 18 अप्रैल को प्रदेश स्तर पर बड़ा महाधरना आयोजित किया जाएगा। इस महाधरने में टीईटी आदेश को निरस्त करने और पुराने शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की प्रमुख मांग रहेगी।
Varsha Shrivastava 
