पेट्रोल-डीजल 3-3 रूपए हुआ महंगा नई कीमतें लागू
पेट्रोल-डीजल 3-3 रूपए हुए महंगे, नई कीमतें लागू दिल्ली में पेट्रोल ₹97.77 लीटर हुआ, कंपनियों को अभी भी 25-30 रूपए का घाटा
देश में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी के दामों में बड़ा इजाफा किया गाय है। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतों में 3.14 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया है। डीजल के रेट भी 3.11 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। सीएनजी भी दो रुपये महंगी हुई है। नई दरें आज से लागू हो गई है। करीब चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन किया गया है। वहीं पेट्रोल, डीजल, सीएनजी के दामों में इजाफे पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।
महानगरों में पेट्रोल की नई कीमतें
शहर पुराने दाम (रुपए/लीटर) नए दाम (रुपए/लीटर) कुल बढ़ोतरी (रुपए)
दिल्ली 94.77 97.77 3.00
मुंबई 103.50 106.68 3.14
कोलकाता 105.45 108.74 3.29
चेन्नई 100.80 103.67 2.87
महानगरों में डीजल की नई कीमतें
शहर पुराने दाम (रुपए/लीटर) नए दाम (रुपए/लीटर) कुल बढ़ोतरी (रुपए)
दिल्ली 87.67 90.67 3.00
मुंबई 90.03 93.14 3.11
कोलकाता 92.02 95.13 3.11
चेन्नई 92.39 95.25 2.86
अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं
मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे।
खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी।
बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?
इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।
2024 से दाम नहीं बदले थे, चुनाव से पहले कटौती हुई थी
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी। हालांकि, तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें विनियमित हैं और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर हर दिन रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें लंबे समय तक नहीं बदला गया।
तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का हो रहा था घाटा
सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं । पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब 30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है ।
क्या अभी और बढ़ेंगे दाम?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि 3 रूपए की बढ़ोतरी काफी नहीं है। अपना घाटा पूरी तरह खत्म करने और 'ब्रेक-ईवन' यानी नो प्रॉफिट-नो लॉस की स्थिति में आने के लिए इन कंपनियों को अभी पेट्रोल के दाम 28 रूपए प्रति लीटर और डीजल के दाम 32 रूपए प्रति लीटर तक बढ़ाने की जरूरत है। फिलहाल पेट्रोल पर 29.5% और डीजल पर 36.5% की कमी बनी हुई है। अगर ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई इसी तरह प्रभावित रही, तो आने वाले दिनों में और भी इजाफा देखने को मिल सकता है।
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटाई थी
इससे पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी 13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपए, जबकि डीजल पर 10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल 21.90 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी। स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्टूटी घटने के बाद यह 11.90 रुपए रह गई थी। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 17.8 रुपए से घटकर 7.8 रुपए पर आ गई थी। सरकार का ये फैसला पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए था। इस निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे।
पीएम ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था। पीएम ने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव भी कम होंगे।

