80 हजार का स्मार्ट टॉयलेट सवालों के घेरे में, शुरू होने से पहले ही हटाने की नौबत

सिंगरौली में 80 हजार रुपये की लागत से लगाया गया स्मार्ट टॉयलेट शुरू होने से पहले ही हटाया जा रहा है, जिससे सरकारी खर्च पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने की मांग की है।

80 हजार का स्मार्ट टॉयलेट सवालों के घेरे में, शुरू होने से पहले ही हटाने की नौबत
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सिंगरौली। न्यायालय परिसर के समीप आम नागरिकों की सुविधा के लिए करीब 80 हजार रुपये की लागत से स्थापित किया गया "स्मार्ट टॉयलेट" अब हटाया जा रहा है। स्थापना के कुछ ही समय बाद इसे हटाने की कार्रवाई शुरू होने से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस उद्देश्य से यह सुविधा स्थापित की गई थी, वह कभी पूरा ही नहीं हो सका और सरकारी धन का उपयोग बिना परिणाम के रह गया।

जानकारी के अनुसार, आधुनिक सार्वजनिक शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्मार्ट टॉयलेट लगाया गया था, लेकिन स्थापना के बाद इसका नियमित संचालन शुरू नहीं हो पाया। लोगों का आरोप है कि तकनीकी और रखरखाव संबंधी समस्याओं के कारण यह टॉयलेट उपयोग में ही नहीं आ सका, जिससे आम नागरिकों को इसका कोई लाभ नहीं मिला।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समाचार पत्रों, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया में मामला प्रमुखता से उठने के बाद संबंधित एजेंसी ने अब स्मार्ट टॉयलेट को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। हालांकि, इसके स्थान पर आगे क्या व्यवस्था की जाएगी, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

नगर पालिक निगम सिंगरौली की नेता प्रतिपक्ष एवं वार्ड पार्षद सीमा जायसवाल ने बताया कि उन्हें इस स्मार्ट टॉयलेट की स्थापना की पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि टॉयलेट लगने के बाद इसकी जानकारी मिली, लेकिन इसका संचालन शुरू नहीं हो सका और बाद में लगातार शिकायतें सामने आने लगीं।

इधर, स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब जनता को सुविधा का लाभ ही नहीं मिला, तो सार्वजनिक धन खर्च करने का औचित्य क्या था। नागरिकों ने यह भी मांग की है कि भविष्य में ऐसी योजनाओं को बिना ठोस संचालन व्यवस्था के लागू न किया जाए, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके।