धार भोजशाला मामले में हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष के ऐतिहासिक साक्ष्य पेश, मंदिर होने का दावा मजबूत
धार भोजशाला मामले में पांचवे दिन की सुनवाई में हिंदू पक्ष ने माननीय हाईकोर्ट के समक्ष ऐतिहासिक, शिल्पकला और प्राचीन ग्रंथों के आधार पर विस्तृत तर्क रखे।
धार भोजशाला मामले में आज हुई पांचवे दिन की सुनवाई में हिंदू पक्ष ने माननीय हाईकोर्ट के समक्ष ऐतिहासिक, शिल्पकला और प्राचीन ग्रंथों के आधार पर विस्तृत तर्क रखे। हिंदू पक्ष की ओर से बताया गया कि भोजशाला कोई साधारण ढांचा नहीं, बल्कि मां सरस्वती को समर्पित एक मंदिर और संस्कृत लर्निंग सेंटर था, जिसका उल्लेख विभिन्न प्राचीन ग्रंथों, ब्रिटिश कालीन ‘गजेटियर’ तथा राजा भोज द्वारा रचित विख्यात ग्रंथों में मिलता है।
हिंदू पक्ष की दूसरी याचिका पर शुक्रवार को शुरू हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता लखनऊ निवासी कुलदीप तिवारी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के वकील मनीष गुप्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि राजा भोज द्वारा लिखी गई पुस्तक समरांग सूत्रधार, जिसे राजा भोज ने नगर नियोजन एवं मंदिर वास्तुकला पर लिखा है, उसमें मंदिरों की संरचना, खंभों, मूर्तियों और शिल्पकला के विस्तृत वर्णन मिलते हैं। गुप्ता द्वारा तर्क दिया गया कि भोजशाला परिसर की संरचन इसके आयाम, खंभों की बनावट, मूर्तियों की शैली सभी समरांग सूत्रधार में वर्णित सिद्धांतों से मेल खाती हैं, जिससे स्पष्ट है कि यह स्थल मूलतः मंदिर था।
मनीष गुप्ता ने 1304 ईसवी में लिखित ‘चिंतामणि’, ब्रिटिश सरकार के 19वीं सदी के धार गजेटियर, तथा अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि धार प्राचीन काल में ज्ञान और विज्ञान का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां बड़े कवि, विद्वान और वैज्ञानिक आते थे तथा भोजशाला इसी विद्या-परंपरा का मुख्य केंद्र थी।
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि एएसआई की खुदाई में मिली ब्रह्मा जी की एक दुर्लभ मूर्ति समरांग सूत्रधार में वर्णित युवा अवस्था वाले ब्रह्मा के स्वरूप से पूरी तरह मेल खाती है। साथ ही, हिंगलाजगढ़, मंदसौर और रायसेन से मिली मूर्तियां भी उसी शिल्प परंपरा की पुष्टि करती हैं। जिस आगे चक्कर परमार कालीन राजवंश ने भी अपनाया था और उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भी इसी निर्माण कला से मेल खाता है।
हिंदू पक्ष ने कहा कि उपरोक्त प्रमाण यह सिद्ध करते हैं कि यह स्थल सरस्वती मंदिर था, जहां प्राचीन काल में विद्या, कला और शास्त्रों का अध्ययन होता था। अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी, जिसमें हिंदू पक्ष समरांग सूत्रधार के आयामों और भोजशाला की संरचना के बीच मेल को और विस्तार से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगा।
Varsha Shrivastava 
