‘बंगाल में कॉकरोच हैं तो हिट भी है’: CJP के दौरे पर केया घोष का तीखा हमला

भाजपा नेता केया घोष ने CJP के पश्चिम बंगाल दौरे पर सवाल उठाते हुए आशुतोष रांका और प्रतिनिधिमंडल की मंशा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बंगाल में समस्या है तो समाधान के लिए ‘हिट’ भी मौजूद है

‘बंगाल में कॉकरोच हैं तो हिट भी है’: CJP के दौरे पर केया घोष का तीखा हमला

 पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे CJP प्रतिनिधिमंडल को लेकर भाजपा नेता केया घोष ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के दौरे की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब बंगाल के स्कूलों की स्थिति देखने के लिए प्रतिनिधिमंडल पहुंच सकता है, तो झारखंड क्यों नहीं गया?

केया घोष ने विशेष रूप से आशुतोष रांका को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जब झारखंड में देवेंद्र नाथ महतो मौत के कगार पर थे, तब आशुतोष रांका को वहां जाना जरूरी नहीं लगा। घोष ने सवाल किया कि उस समय झारखंड से दूरी बनाए रखने के बाद अब पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था को लेकर इतनी सक्रियता क्यों दिखाई जा रही है।

उन्होंने झारखंड की घटना के बाद हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। घोष के मुताबिक, सरकार ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

‘तीन महीने पहले बंगाल के स्कूल देखने क्यों नहीं आए?’

केया घोष ने CJP प्रतिनिधिमंडल की टाइमिंग पर दूसरा बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अगर वास्तव में पश्चिम बंगाल के स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था की चिंता है, तो प्रतिनिधिमंडल तीन महीने पहले बंगाल क्यों नहीं आया?

उन्होंने कहा कि बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए केवल हाल की घटनाओं को देखना पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक, वामपंथी शासन के 34 साल और टीएमसी सरकार के लगभग 15 साल में शिक्षा व्यवस्था में जो समस्याएं पैदा हुईं, उनका असर आज दिखाई दे रहा है।

‘केरल, कर्नाटक या पंजाब क्यों नहीं जाएंगे?’

भाजपा नेता ने CJP के दौरे को लेकर सबसे सीधा राजनीतिक सवाल राज्यों के चयन पर उठाया। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल केरल, कर्नाटक या पंजाब क्यों नहीं जाएगा?

घोष ने आरोप लगाया कि इससे उनका एजेंडा साफ दिखाई देता है। उनका सवाल था कि अगर शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं का अध्ययन करना ही उद्देश्य है, तो दूसरे राज्यों की स्थिति का भी जायजा लिया जाना चाहिए। उन्होंने बंगाल को लेकर की जा रही सक्रियता को चुनिंदा और राजनीतिक नजरिए से प्रेरित बताया।

‘पांच दशकों की गड़बड़ी तीन महीने में कैसे ठीक होगी?’

केया घोष ने कहा कि बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं की जड़ को लंबे राजनीतिक इतिहास में देखना होगा। उन्होंने सवाल किया कि वामपंथी शासन के 34 साल और टीएमसी के करीब 15 साल में पैदा हुई समस्याओं को क्या केवल तीन महीने में ठीक किया जा सकता है?

उनका इशारा इस बात की ओर था कि मौजूदा समस्याओं की जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि पिछले कई दशकों में शिक्षा व्यवस्था किस तरह बदली और बिगड़ी।

‘बंगाल में कॉकरोच हैं तो हिट भी है’

अपने बयान के अंत में केया घोष ने CJP के दौरे पर बेहद तीखे अंदाज में तंज कसा। उन्होंने कहा, “अगर बंगाल में कॉकरोच हैं, तो ‘हिट’ भी मौजूद है।”

इस टिप्पणी के जरिए घोष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि अगर बंगाल की शिक्षा व्यवस्था में समस्याएं हैं, तो राज्य सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई भी कर रही है। उन्होंने CJP प्रतिनिधिमंडल की भूमिका और उसके दौरे के उद्देश्य पर सवाल खड़े करते हुए इसे राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है।

CJP के बंगाल दौरे ने एक बार फिर राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक टकराव तेज कर दिया है। एक ओर शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर सवाल हैं, तो दूसरी ओर भाजपा ने सवाल उठाया है कि इन सवालों को उठाने वालों का चयन और उनकी सक्रियता सिर्फ बंगाल तक ही क्यों सीमित है। यही सवाल अब इस पूरे विवाद के केंद्र में है।