सहकारी कर्मचारियों की गोपनीय चरित्रावली (CR) पर बढ़ा विवाद, कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने रखीं तीन चरणों में मांगें

मध्य प्रदेश के सहकारी कर्मचारियों ने गोपनीय चरित्रावली (CR) में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग उठाई है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने तीन चरणों में मांगपत्र रखने की तैयारी की है

सहकारी कर्मचारियों की गोपनीय चरित्रावली (CR) पर बढ़ा विवाद, कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने रखीं तीन चरणों में मांगें

भोपाल। मध्य प्रदेश के सहकारी कर्मचारियों की गोपनीय चरित्रावली (Confidential Report-CR) को लेकर कर्मचारियों में लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है. कर्मचारी संगठनों ने सरकार के समक्ष तीन चरणों में मांगपत्र पेश करने की तैयारी की है. संगठनों का आरोप है कि वर्तमान CR प्रणाली में पारदर्शिता का अभाव है, जिसके कारण कर्मचारियों को बिना सूचना दिए निम्न ग्रेडिंग दे दी जाती है. इसका सीधा असर उनकी पदोन्नति और सेवा रिकॉर्ड पर पड़ रहा है.

संगठनों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही इस व्यवस्था के कारण हजारों कर्मचारियों का करियर प्रभावित हुआ है. उनका आरोप है कि CR सुधार को लेकर जारी सरकारी निर्देश भी अधिकांश विभागों में लागू नहीं किए जा रहे हैं.

मार्च 2026 के निर्देशों का पालन नहीं होने का आरोप

कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, मार्च 2026 में सरकार ने सीआर के प्रकटन, आपत्ति दर्ज करने और अपग्रेडेशन की प्रक्रिया को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे. लेकिन अधिकांश विभागों में इनका पालन नहीं हो रहा है. इसी वजह से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी है और अब संगठन सीधे सरकार से जवाब मांग रहे हैं.

पहला चरण: तत्काल लागू करने योग्य छह प्रमुख मांगें

कर्मचारी संगठनों ने पहले चरण में सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए छह प्रमुख मांगें रखी हैं।

  • पदोन्नति प्रक्रिया पर फिलहाल अस्थायी रोक लगाई जाए।
  • सीआर का प्रकटन और डाउनलोड की सुविधा एक ही दिन उपलब्ध कराई जाए।
  • कोरोना काल (2023-24 और 2024-25) के दौरान दी गई निम्न ग्रेडिंग समाप्त की जाए।
  • सीआर का मूल्यांकन निर्धारित मापदंडों के आधार पर किया जाए।
  • निम्न ग्रेडिंग या प्रतिकूल टिप्पणी मिलने पर संबंधित कर्मचारी को अनिवार्य रूप से सूचना दी जाए।
  • पूरे मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय समिति गठित की जाए।

संगठनों का कहना है कि इन मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जाना चाहिए।

दूसरा चरण: अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग

संगठनों का कहना है कि केवल प्रक्रिया में सुधार पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जवाबदेही तय करना भी जरूरी है। इसके तहत उन्होंने मांग की है कि—

  • दुर्भावनापूर्ण तरीके से सीआर लिखने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
  • बिना नोटिस दिए प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने वाले अधिकारियों पर आर्थिक दंड लगाया जाए।
  • आवश्यकता पड़ने पर ऐसे अधिकारियों की वेतनवृद्धि रोकने का भी प्रावधान किया जाए।

संगठनों का मानना है कि इससे अधिकारी अधिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य करेंगे।

तीसरा चरण: स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव

भविष्य में इस तरह के विवाद समाप्त करने के लिए कर्मचारी संगठनों ने कुछ स्थायी सुधारों का भी सुझाव दिया है।

  • प्रत्येक कर्मचारी की लॉगिन आईडी पर सीआर की लाइव ट्रैकिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
  • सीआर डाउनलोड करने का विकल्प दिया जाए।
  • सीआर अपग्रेडेशन के आवेदन के लिए तय समय-सारणी बनाई जाए।
  • कर्मचारियों के आवेदनों की ई-फाइल ट्रैकिंग की व्यवस्था हो।
  • हर महीने प्रगति रिपोर्ट जारी करना अनिवार्य किया जाए।

संगठनों का कहना है कि इन सुधारों से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।

मांगें लागू हुईं तो कर्मचारियों को मिलेगी राहत

यदि सरकार इन मांगों को स्वीकार करती है तो मध्य प्रदेश में गोपनीय चरित्रावली की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकती है। कर्मचारियों को अपनी सीआर समय पर देखने, आपत्ति दर्ज कराने और पदोन्नति से पहले आवश्यक सुधार का अवसर मिलेगा। वहीं अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

हालांकि अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। कर्मचारी संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।