मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्यों में हुई तोड़फोड़, सुमित्रा महाजन ने प्रशासन से मंगवाई विस्तृत रिपोर्ट

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्यों के दौरान हुई तोड़फोड़ पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ने घाट पर हुए नुकसान को लेकर स्थानीय लोगों से बात की और प्रशासन से रिपोर्ट मंगवाई।

मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्यों में हुई तोड़फोड़, सुमित्रा महाजन ने प्रशासन से मंगवाई विस्तृत रिपोर्ट
Sumitra Mahajan

इंदौर। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर हाल ही में विकास कार्यों के दौरान हुई तोड़फोड़ को लेकर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ने बड़ा बयान दिया है। सुमित्रा महाजन ने कहा कि घाट पर हुए नुकसान की जानकारी मिलते ही उन्होंने तुरंत स्थानीय लोगों से बात की और प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मंगवाई। रिपोर्ट में बताया गया कि निर्माण कार्यों के दौरान जेसीबी का हल्का धक्का लगने से पुराना ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ, जिसे गलती मानते हुए प्रशासन ने तुरंत सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पूर्व स्पीकर ने कहा कि मणिकर्णिका घाट अत्यंत प्राचीन है और यहां कई सौ साल पुराने मंदिर और अन्य संरचनाएं मौजूद हैं। ऐसे में विकास कार्यों के दौरान गलती से नुकसान होना संभव है, लेकिन प्रशासन ने इसे स्वीकार कर सुधारात्मक कार्रवाई की है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके घर के पास भी पानी की लाइन टूटने पर गंदा पानी आने लगा था—इस तरह के हादसे कहीं भी हो सकते हैं, पर तुरंत सुधार करना सबसे जरूरी होता है।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का दिया उदाहरण

सुमित्रा महाजन ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विकास और विरासत का संतुलन बनाकर कार्य किया गया। उन्होंने आश्वस्त किया कि उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार धरोहरों के महत्व को समझते हुए मणिकर्णिका घाट पर भी सुविधाओं के विस्तार जैसे सार्वजनिक शौचालय, रास्तों का सुधार और घाट के सौंदर्यीकरण पर काम कर रही हैं। पूर्व स्पीकर ने जोर देकर कहा कि इतिहास को सहेजना और भविष्य के लिए विकास करना दोनों आवश्यक हैं। उन्होंने कहा, “दुख जरूर हुआ है, लेकिन गलती सुधारने की जिम्मेदारी प्रशासन ने ली है। हमारी मंशा यही है कि धरोहर सुरक्षित रहें और आम लोगों को बेहतर सुविधाएँ मिलें।”

'आया राम, गया राम' पर ताई का सख्त संदेश

इंदौर से आठ बार सांसद रहीं सुमित्रा महाजन ने मीडिया से चर्चा के दौरान पार्टी छोड़कर कांग्रेस में गए नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ कहा कि दल बदलने वालों को जिस भी पार्टी में जाएं, ईमानदारी से काम करना चाहिए, वरना बदनामी भाजपा की ही होती है। सुमित्रा महाजन ने इस दौरान “आया राम, गया राम” की राजनीति पर भी तंज कसाते हुए उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को नसीहत दी जो भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। सुमित्रा महाजन ने कहा कि वह हमेशा सभी को अच्छा काम करने की सीख देती हैं, चाहे वे किसी भी दल में क्यों न हों। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा से कांग्रेस में गए लोग अच्छा काम नहीं करेंगे, तो कांग्रेस के लोग यही कहेंगे कि बीजेपी से आए हुए नेता काम नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में बदनामी कांग्रेस की नहीं, बल्कि भाजपा की होती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो भी “आया राम, गया राम” पद्धति के लोग हैं, उन्हें जिस भी दल में रहें, पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करना चाहिए। सुमित्रा महाजन के इस बयान को मौजूदा राजनीतिक हालात और लगातार हो रहे दल-बदल के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।