बरगी डैम क्रूज हादसा: अफसरों को पहले से था खतरे का अंदेशा, फिर भी पानी में उतार दी मौत की नाव

Jabalpur Bargi Dam Cruise Accident: जबलपुर के बरगी बांध में 30 अप्रैल को हुए भीषण क्रूज हादसे के बाद अब ऐसा खुलासा सामने आया है, जिसने पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बोट की मरम्मत से जुड़ी कंपनी, हैदराबाद बोट बिल्डर्स ने यूनिट को ईमेल के जरिए बताया कि इंजन बहुत पुराने हो गए हैं और उनके स्पेयर पार्ट्स अब मार्केट में मौजूद नहीं हैं.

बरगी डैम क्रूज हादसा: अफसरों को पहले से था खतरे का अंदेशा, फिर भी पानी में उतार दी मौत की नाव

30 अप्रैल को जबलुर के बरगी डैम में जो क्रूज हादसा हुआ था वो अफसरों की लापरवाही से हुआ था. अफसरों को पता था कि वे जो कर रहे हैं. वो लापरवाही है. उससे लोगों की मौत हो सकती है. बावजूद इसके इसे रोकने की जहमत किसी ने नहीं उठाई. उनकी टेबल पर जो फाइलें थीं वो हादसे के लिए आगाह कर रही थीं. लेकिन, उन्हें पलटना तो दूर उन पर नजरें तक नहीं फेरी गईं. अगर उन फाइलों की धूल साफ कर. उसमें लिखी रिपोर्ट को पढ़ लिया जाता तो आज वो 13 लोग जिंदा होते.  

30 अप्रैल को हुआ था हादसा

जबलपुर के बरगी बांध में 30 अप्रैल को हुए भीषण क्रूज हादसे के बाद अब ऐसा खुलासा सामने आया है. जिसने पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्रूज हादसे से करीब दो महीने पहले… यानी 1 मार्च 2026 को… पर्यटन विभाग के अधिकारियों को बाकायदा लिखित चेतावनी दी गई थी. मैकल रिसॉर्ट और वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के अधिकारियों ने साफ कहा था कि दोनों क्रूज बोट के इंजन बार-बार खराब हो रहे हैं. उन्हें तुरंत बदलने की जरूरत है. इतना ही नहीं, 14 जनवरी 2025 की उस घटना का भी जिक्र किया गया था. जब ‘रीवा’ क्रूज बोट के दोनों इंजन बीच राउंड में बंद हो गए थे. सोचिए, अगर उसी दिन बड़ा हादसा हो जाता तो?

चौंकाने वाली बात ये भी है कि बोट बनाने वाली कंपन. हैदराबाद बोट बिल्डर्स ने भी साफ कह दिया था कि इंजन इतने पुराने हो चुके हैं कि उनके स्पेयर पार्ट्स तक मार्केट में उपलब्ध नहीं हैं. कंपनी ने साफ सलाह दी थी. दोनों इंजन बदल दीजिए. यह चेतावनी दूसरी बोट 'मैकल सुता' पर भी लागू होती है जो 30 अप्रैल को हादसे का शिकार हुई. 

जबलपुर में पर्यटन निगम के रीजनल मैनेजर को लिखे इस लेटर में कहा गया था कि दोनों क्रूज बोट की कई बार मरम्मत की गई थी. लेकिन, उनमें इंजन की बार-बार आने वाली समस्याएं बनी रहीं. उनमें से एक क्रूज बोट 'मैकल सुता' 2006 में और दूसरी बोट 'रीवा' 2007 में शुरू हुई थी. लेटर में ये भी जोड़ा गया कि अधिकारियों को "लेटर लिख-लिख कर कई बार" इस ​​बारे में जानकारी दी गई थी. शिकायत के साथ लेटर में अधिकारियों से आग्रह भी किया गया था कि वे पर्यटकों का सीजन जोर पकड़ने से पहले मरम्मत का काम पूरा कर लें या इंजन बदल दें. लेकिन, इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया. 30 अप्रैल को हुए क्रूज हादसे में 13 टूर‍िस्ट को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. वहीं 28 टूरिस्ट्स को सकुशल बचा लिया गया था. इसके बाद राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए थे. सुरक्षा समीक्षा पूरी होने तक पूरे मध्य प्रदेश में इसी तरह के क्रूज संचालन पर रोक लगा दी गई थी.

अब तक क्या-क्या हुआ? 

घटना के बाद जबलपुर में पर्यटन निगम के रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा को हटाकर उन्हें पर्यटन विभाग के भोपाल मुख्यालय में अटैच कर दिया गया है. इसके अलावा सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग बनाया गया है. जिसे 3 महीने में रिपोर्ट देनी है. क्रूज के पायलट, हेल्पर और टिकट प्रभारी को बर्खास्त कर दिया गया, जबकि मैनेजर को सस्पेंड किया गया है. जबलपुर हाईकोर्ट ने क्रू मेंबर्स पर FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं. साथ ही प्रदेश में क्रूज संचालन पर अस्थायी रोक लगाकर घाटों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है.  लेकिन सवाल अब भी वही है कि जब खतरे की जानकारी पहले से थी, तो पुराने और खराब क्रूज को पर्यटकों के साथ पानी में क्यों उतारा गया. सिर्फ क्रूज चालक पर कार्रवाई करने के बजाय उन अधिकारियों की जिम्मेदारी क्यों नहीं तय की जा रही है, जिन्होंने चेतावनी मिलने के बाद भी संचालन जारी रखने की अनुमति दी.