Justice Yashwant Varma पर आरोप साबित, संसद में पेश हुई Cash Case की रिपोर्ट

Justice Yashwant Varma Cash Case में Parliament-appointed inquiry committee ने तीनों charges proved माने हैं। रिपोर्ट लोकसभा और राज्यसभा में पेश कर दी गई।

Justice Yashwant Varma पर आरोप साबित, संसद में पेश हुई Cash Case की रिपोर्ट

पूर्व Allahabad High Court judge Justice Yashwant Varma से जुड़े cash-at-home मामले में जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार को संसद के दोनों सदनों में पेश कर दी गई। लोकसभा की ओर से गठित Judges Inquiry Committee ने अपनी रिपोर्ट में उनके खिलाफ लगाए गए तीनों charges को proved माना है। समिति ने कहा कि उनके सरकारी आवास के store room में बड़ी मात्रा में बिना हिसाब की ₹500 की currency notes मिली थीं और Justice Varma इस cash की मौजूदगी, source या ownership को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

तीनों आरोपों को समिति ने माना साबित

जांच समिति के मुताबिक Justice Yashwant Varma के खिलाफ तीन मुख्य आरोप लगाए गए थे। पहला आरोप official premises में unexplained Indian currency notes की मौजूदगी और possession से जुड़ा था। दूसरा आरोप घटना के बाद material evidence को preserve नहीं करने और उसमें interference से जुड़ा था। तीसरा आरोप inquiry के दौरान evasive और misleading explanation देने का था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इन तीनों आरोपों को evidence के आधार पर साबित पाया गया। जांच के दौरान documentary और electronic material के साथ witnesses के statements भी रिकॉर्ड किए गए थे।

सरकारी आवास के store room में मिले थे जले हुए नोट

पूरा मामला 14 मार्च 2025 की रात सामने आया था। उस समय Justice Varma Delhi High Court के judge थे और उनका सरकारी आवास 30, Tughlaq Crescent में था। वहां आग लगने के बाद firefighters ने store room में जले और आधे जले हुए ₹500 के नोट देखे थे। इस घटना के बाद cash को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। Supreme Court की ओर से भी मामले की in-house inquiry कराई गई और बाद में Parliament की प्रक्रिया के तहत अलग जांच समिति बनाई गई। उपलब्ध जांच रिकॉर्ड में store room में currency notes की मौजूदगी को कई witnesses के statements और अन्य material से corroborate किया गया था।

Cash की मौजूदगी पर नहीं दे पाए संतोषजनक जवाब

जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि store room सरकारी आवास की premises के भीतर था और वहां बड़ी मात्रा में ₹500 denomination की unexplained currency मिली थी। समिति के मुताबिक Justice Varma cash की presence, उसके source और ownership को लेकर satisfactory explanation नहीं दे पाए। रिपोर्ट में उनके जवाब को circumstances और दूसरे evidence के सामने “evasive” और “unsatisfactory” बताया गया। समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में एक judge से जिस candour, transparency और institutional responsibility की उम्मीद की जाती है, वह उनके जवाबों में दिखाई नहीं दी।

Evidence से छेड़छाड़ का भी आरोप साबित

समिति ने सिर्फ cash की मौजूदगी को लेकर ही नहीं, बल्कि घटना के बाद material evidence को preserve करने में failure और उसमें interference के आरोप को भी सही पाया। मामले की शुरुआती जांच में यह सवाल उठा था कि आग लगने के बाद store room और वहां मौजूद debris को किस तरह handle किया गया। Supreme Court की पहले की जांच में भी घटना के बाद debris हटाए जाने और मौके को लेकर कई सवाल सामने आए थे।

Justice Varma ने आरोपों से किया था इनकार

Justice Yashwant Varma ने पूरे मामले में खुद पर लगाए गए आरोपों से इनकार किया था। अप्रैल 2026 में उन्होंने Parliament-appointed inquiry proceedings से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ कार्रवाई concrete evidence के बजाय suggestions, imputations और presumptions पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा था कि घटना के समय वह अपने आवास पर मौजूद नहीं थे। इसके बाद 9 अप्रैल 2026 को उन्होंने अपने पद से resignation दे दिया था। इस्तीफे के बाद वह अब judge के पद पर नहीं हैं।

Parliament में रिपोर्ट पेश होने के बाद क्या होगा?

Judges Inquiry Committee ने अपनी रिपोर्ट पहले 18 मई 2026 को Lok Sabha Speaker Om Birla को सौंप दी थी। उस समय Lok Sabha Secretariat ने कहा था कि Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत रिपोर्ट को उचित समय पर संसद के दोनों सदनों में रखा जाएगा। बुधवार को यह प्रक्रिया पूरी हो गई और रिपोर्ट दोनों सदनों में पेश कर दी गई। हालांकि Justice Varma के resignation के बाद उनके खिलाफ removal यानी impeachment की प्रक्रिया को लेकर कानूनी स्थिति अलग हो गई है। कुछ constitutional experts का कहना है कि किसी व्यक्ति के judge के पद से इस्तीफा देने के बाद उसे removal process के जरिए हटाने का सवाल नहीं रह जाता। इसलिए अब इस report के आगे parliamentary treatment को लेकर भी कानूनी और संवैधानिक सवाल बने हुए हैं। फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा development यही है कि Parliament-appointed inquiry committee ने Justice Yashwant Varma के खिलाफ लगाए गए तीनों charges को proved माना है और उसकी final report दोनों सदनों में पेश हो चुकी है। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि report में findings आने और किसी criminal court में criminal liability साबित होने की प्रक्रिया अलग-अलग हैं।