West Bengal में OBC आरक्षण 17% से घटकर 7%, ममता सरकार की OBC-A और OBC-B व्यवस्था हुई खत्म 

अब सिर्फ 66 जातियां OBC आरक्षण के दायरे में, धर्म आधारित वर्गीकरण की व्यवस्था भी खत्म, कलकत्ता हाईकोर्ट के 2024 के आदेश के आधार पर लिया फैसला

West Bengal में OBC आरक्षण 17% से घटकर 7%, ममता सरकार की OBC-A और OBC-B व्यवस्था हुई खत्म 

West Bengal की नई Suvendu Adhikari सरकार ने राज्य की OBC आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। बीजेपी सरकार ने OBC आरक्षण को 17% से घटाकर 7% कर दिया है। इसके साथ ही ममता बनर्जी सरकार के समय पर लागू OBC-A और OBC-B की व्यवस्था भी खत्म कर दी गई है। नई सूची के मुताबिक अब राज्य में सिर्फ 66 जातियां ही OBC आरक्षण के दायरे में रहेंगी। सरकार का कहना है कि यह फैसला Calcutta High Court के 2024 के आदेश के आधार पर लिया गया है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदली व्यवस्था

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2024 में अपने फैसले में कहा था कि 2010 से 2012 के बीच OBC सूची में 77 नई जातियों को शामिल करने की प्रक्रिया नियमों के मुताबिक नहीं अपनाई गई थी। कोर्ट ने इसे असंवैधानिक और अवैध माना था। इसके बाद 2010 के बाद जारी हुए करीब 12 लाख OBC प्रमाणपत्र रद्द हो गए थे।

हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि 2010 से पहले OBC सूची में शामिल जातियों का दर्जा जारी रहेगा। साथ ही, OBC आरक्षण के आधार पर पहले से सरकारी नौकरी पा चुके लोगों की नियुक्तियों पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा।

खत्म हुई OBC-A और OBC-B व्यवस्था

पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की सरकार ने OBC आरक्षण को दो हिस्सों में बांटा था। OBC-A वर्ग को 10% और OBC-B वर्ग को 7% आरक्षण दिया गया था। इसी दौरान कई नई जातियों को भी सूची में शामिल किया गया था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब नई बीजेपी सरकार ने यह व्यवस्था खत्म कर दी है।

नई सूची में कपाली, कुर्मी, कर्मकार, सूत्रधार, स्वर्णकार, नाई, तांती, धनुक, कसाई, खंडायत, तुरहा, देवांग और गोआला जैसी जातियां शामिल हैं। इसके अलावा पहाड़िया, हज्जाम और चौधुली जैसे तीन मुस्लिम समुदायों को भी सूची में रखा गया है।

सरकार ने कहा है कि OBC ढांचे की नई समीक्षा की जाएगी। इसके लिए एक जांच समिति बनाई जाएगी। समिति हाईकोर्ट की टिप्पणियों के आधार पर नई सिफारिशें देगी और जरूरत पड़ने पर कुछ समूहों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए दोबारा सूची में शामिल किया जा सकता है।

कैबिनेट बैठक में लिए गए 7 बड़े फैसले 

1. सरकारी नौकरियों की उम्र सीमा बढ़ी:- राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 5 साल बढ़ाने का फैसला किया है। अब ग्रुप A पदों के लिए उम्र सीमा 41 साल, ग्रुप B के लिए 44 साल और ग्रुप C-D के लिए 45 साल होगी। SC, ST, OBC और दिव्यांग उम्मीदवारों को मिलने वाली अतिरिक्त छूट जारी रहेगी।

2. भ्रष्टाचार जांच के लिए कमेटी:- राज्य में सरकारी योजनाओं और निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए रिटायर्ड जज जस्टिस बिश्वजीत बसु की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाएगी। यह पैनल कटमनी, रिश्वतखोरी और सरकारी फंड के दुरुपयोग की जांच करेगा।

3. महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर आयोग:- महिलाओं और बच्चियों पर अत्याचार के मामलों की जांच के लिए जस्टिस समाप्ति चटर्जी की अध्यक्षता में अलग आयोग बनाया जाएगा। यह आयोग महिलाओं, बच्चों, SC-ST और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मामलों की निगरानी करेगा।

4. धार्मिक मानदेय योजना बंद:- सरकार ने इमाम, मुअज्जिन और पुजारियों को धार्मिक आधार पर मिलने वाला सरकारी मानदेय 1 जून से बंद करने का फैसला लिया है। अभी तक इमामों को 3000 रुपए और मुअज्जिन व पुजारियों को 2000 रुपए मासिक सहायता दी जाती थी।

5. महिलाओं को हर महीने 3000 रुपए:- कैबिनेट ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ को मंजूरी दी है। इसके तहत महिलाओं को हर महीने 3000 रुपए की आर्थिक सहायता मिलेगी। पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा।

6. महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा:- राज्य सरकार ने 1 जून से महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का फैसला किया है। हालांकि बसों की संख्या बढ़ाने पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।

7. 7वें वेतन आयोग को मंजूरी:- राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वेतन संशोधन के लिए 7वें राज्य वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। इसका लाभ सरकारी कर्मचारियों के साथ नगर निकायों, शिक्षा बोर्ड और सरकारी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों को भी मिलेगा।