कल मोहन कैबिनेट में मिल सकती है तबादला नीति 2026 को मंजूरी, ट्रांसफर नियमों में बड़े बदलाव संभव
मध्य प्रदेश सरकार की वर्ष 2026 की नई तबादला नीति को कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है। इसका ड्राफ्ट सामान्य प्रशासन विभाग ने तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है।
मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही कर्मचारियों के लिए नई तबादला नीति 2026 को मंजूरी दे सकती है। कल बुधवार को होने वाली मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस नीति का ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है। अब अंतिम मंजूरी के बाद इसे लागू करने का रास्ता साफ हो सकता है।
कैबिनेट बैठक में होगा अहम फैसला
सूत्रों के अनुसार, 20 मई बुधवार को मंत्रालय में होने वाली कैबिनेट बैठक सुबह 11 बजे प्रस्तावित है। इस बैठक में अन्य एजेंडों के साथ तबादला नीति 2026 का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बीच ड्राफ्ट पर चर्चा के बाद इसे कैबिनेट में अंतिम मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
इससे पहले कैबिनेट बैठक की तारीख में बदलाव भी हुआ था। पहले यह बैठक 18 मई को होनी थी, लेकिन मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिव्यू मीटिंग और अन्य व्यस्तताओं के कारण इसे टाल दिया गया था। मंगलवार को सीएम दिनभर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा ली जाने वाली जगदलपुर में आयोजित क्षेत्रीय परिषद की बैठक में व्यस्त रहे। इस कारण मंगलवार को भी कैबिनेट बैठक नहीं हो सकी।
प्रशासनिक तबादलों में अलग व्यवस्था
नई तबादला नीति में सबसे बड़ा बदलाव यह माना जा रहा है कि स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जा सकता है। अब तक दोनों प्रकार के ट्रांसफर एक ही कोटे में शामिल होते थे, जिससे प्रशासनिक जरूरतों के लिए सीमित अवसर मिलते थे।
पहले कुल कार्यरत कर्मचारियों के 10 से 15 प्रतिशत तक ही तबादलों की अनुमति होती थी। इस व्यवस्था में स्वैच्छिक और आपसी तबादले भी इसी सीमा में आते थे। नई नीति में प्रशासनिक तबादलों के लिए ज्यादा लचीलापन दिए जाने की संभावना है, ताकि जरूरी स्थानों पर कर्मचारियों की तैनाती आसानी से की जा सके।
जिले स्तर पर कलेक्टर-प्रभारी मंत्री को जिम्मेदारी
प्रस्तावित नीति के अनुसार, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले जिले के भीतर प्रभारी मंत्री और कलेक्टर के माध्यम से किए जा सकते हैं। प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद कलेक्टर ट्रांसफर सूची जारी करेंगे।
वहीं, प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के तबादले के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य होगी। इसके अलावा यह भी प्रस्ताव है कि जिन कर्मचारियों का तबादला पिछले एक वर्ष में हो चुका है, उनका सामान्य परिस्थितियों में दोबारा ट्रांसफर नहीं किया जाएगा।
विभागों को मिल सकती है अलग नीति बनाने की छूट
नई व्यवस्था में यह भी प्रस्तावित है कि सभी विभाग ऑनलाइन माध्यम से तबादला आवेदन स्वीकार करेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग हर साल की तरह अपनी अलग तबादला नीति जारी कर सकता है। इसके अलावा जनजातीय कार्य विभाग, राजस्व विभाग और ऊर्जा विभाग जैसे कुछ अन्य विभाग भी अपनी अलग नीति रख सकते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि सभी विभागों को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तय मूल नियमों का पालन करना होगा और उससे अलग कोई बड़ी नीति नहीं बनाई जा सकेगी।
राज्यमंत्रियों के स्वेच्छानुदान में बढ़ोतरी
कैबिनेट बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण फैसला स्वेच्छानुदान से जुड़ा रहा। सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्यमंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि बढ़ाकर अब 25,000 रुपये कर दी है। इससे पहले यह राशि 16,000 रुपये थी।
इससे पहले कैबिनेट मंत्रियों का स्वेच्छानुदान बढ़ाकर 40,000 रुपये प्रति व्यक्ति किया जा चुका है। अब राज्यमंत्रियों के लिए भी इस बढ़ी हुई राशि को मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद वे किसी व्यक्ति के लिए अधिक राशि स्वीकृत कर सकेंगे।
Varsha Shrivastava 
