कान्हा टाइगर रिज़र्व में लोकप्रिय बाघ ‘महावीर’ की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप
कान्हा टाइगर रिज़र्व में पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय बाघ ‘महावीर’ की मौत, वन्यजीव सुरक्षा पर उठे सवाल
कान्हा टाइगर रिजर्व के प्रसिद्ध नर बाघ की 19 मई मंगलवार को मौत हो गई। महावीर नामक टाइगर का कान्हा के किसली और मुक्की जोन में अक्सर दीदार होता रहा है। यह अपनी विशाल काया और शांत स्वभाव के लिए पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा। वहीं, कान्हा में एक के बाद एक बाघ मर रहे हैं और यह बहुत ही चिंताजनक स्थिति है। दो महीने के भीतर 7-8 बाघों की मौत हो चुकी है।
कान्हा, बांधवगढ़, सतपुड़ा और पेंच टाइगर रिजर्व में हो रही टाइगरों की मौत से मुख्यालय से फील्ड में पदस्थ अफसरों के प्रबंधन पर सवाल उठने लगे है। वन प्राणियों का मानना है कि इस सम्बन्ध में राज्य सरकार को कड़े कदम यानि बड़े पैमाने पर उठाने पड़ेंगे। यानि प्रशासनिक सजगता की आवश्यकता है।
जनवरी से अब तक 34 बाघों की मौत
जनवरी 2026 से मध्य प्रदेश में 32 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से 7 की मौत शिकार से संबंधित घटनाओं के कारण हुई। शिकार से संबंधित सभी 7 बाघों की मौतें बिजली के झटके के कारण हुईं। इनमें से पांच बाघिनें 18 महीने से आठ साल की उम्र की थीं। ये मौतें पूर्वी मंडला, उत्तरी शाहडोल, पश्चिमी छिंदवाड़ा वन प्रभाग, उमरिया और दक्षिणी सिवनी वन क्षेत्र में हुईं। वहीं, बाकी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। पिछली बाघ जनगणना के अनुसार, राज्य में 785 बाघ हैं, जिनमें से 35% संरक्षित क्षेत्रों से बाहर हैं।
Varsha Shrivastava 
