दिल्ली में नहीं मिलेगी Absolut Vodka! 3000 करोड़ टैक्स केस में कंपनी को बड़ा झटका

Pernod Ricard को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने राजधानी में अपने प्रोडक्ट्स बेचने की अनुमति मांगी थी। Absolut Vodka बनाने वाली कंपनी पर दिल्ली शराब नीति विवाद और टैक्स गड़बड़ी से जुड़े गंभीर आरोप लगे हैं।

दिल्ली में नहीं मिलेगी Absolut Vodka! 3000 करोड़ टैक्स केस में कंपनी को बड़ा झटका

नई दिल्ली..देश की राजधानी दिल्ली में मशहूर एब्सोल्यूट वोदका और स्कॉच व्हिस्की के शौकीनों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। इन मशहूर ब्रांड्स को बनाने वाली फ्रांस की दिग्गज शराब कंपनी पेरनोड रिकार्ड को दिल्ली हाई कोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने कंपनी की उस याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें उसने दिल्ली के बाजारों में अपने प्रोडक्ट्स को फिर से बेचने की इजाजत मांगी थी। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब साफ हो गया है कि दिल्ली में कंपनी के ब्रांड्स पर लगी पाबंदी फिलहाल जारी रहेगी। गौरतलब है कि साल दो हजार तेईस से ही इस कंपनी के प्रोडक्ट्स दिल्ली के ठेकों और बार में उपलब्ध नहीं हैं।

जानिए क्या है पूरा विवाद और क्यों नहीं मिल रहा लाइसेंस..
फ्रांसीसी कंपनी पेरनोड रिकार्ड और दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग के बीच यह कानूनी लड़ाई पिछले तीन सालों से चल रही है। दिल्ली के अधिकारियों ने कंपनी को नया बिजनेस लाइसेंस देने से बार बार साफ इनकार किया है। इसके पीछे अधिकारियों ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के उन आरोपों का हवाला दिया है जिसमें कहा गया है कि कंपनी साल दो हजार इक्कीस के चर्चित दिल्ली शराब नीति विवाद में सीधे तौर पर शामिल थी।

ईडी के मुताबिक कंपनी ने कुछ खुदरा विक्रेताओं के साथ मिलकर गैर कानूनी तरीके से दिल्ली के बाजार में अपना शेयर बढ़ाने की कोशिश की थी। हालांकि कंपनी ने अदालत में दलील दी थी कि उन पर अभी तक कोई दोष साबित नहीं हुआ है इसलिए उनका लाइसेंस नहीं रोका जाना चाहिए लेकिन हाई कोर्ट ने कहा कि मौजूदा जांच के चलते कंपनी इस समय लाइसेंस के लिए अयोग्य है।

भारत में तीन हजार करोड़ रुपये के भारी भरकम टैक्स केस में भी फंसी कंपनी..
लाइसेंस रद्द होने के साथ साथ यह फ्रांसीसी कंपनी भारत में एक बहुत बड़े टैक्स फ्रॉड के मामले से भी जूझ रही है। राजस्व अधिकारियों ने पेरनोड रिकार्ड पर आरोप लगाया है कि उसने भारत में अपनी महंगी स्कॉच व्हिस्की का आयात करते समय उसकी उम्र और बनावट से जुड़ी असली जानकारियां छुपाईं ताकि कम टैक्स देना पड़े।
नियम के मुताबिक व्हिस्की जितनी पुरानी होती है उस पर लगने वाला सीमा शुल्क यानी इंपोर्ट ड्यूटी उतनी ही ज्यादा होती है। जांच में सामने आया है कि पेरनोड रिकार्ड ने अपने स्कॉच आयात की वास्तविक कीमत को कागजों पर करीब सरसठ प्रतिशत तक कम करके दिखाया जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

केस हारने पर बढ़ सकती है पांच हजार करोड़ से ज्यादा की देनदारी..
इस कथित टैक्स चोरी को पकड़ने के बाद भारतीय सीमा शुल्क अधिकारियों ने कंपनी को करीब तीन हजार करोड़ रुपये का बकाया टैक्स चुकाने का नोटिस थमाया है। पेरनोड रिकार्ड इस समय इस टैक्स असेसमेंट के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही है। जानकारों के मुताबिक अगर कंपनी टैक्स चोरी का यह बड़ा केस हार जाती है तो ब्याज और भारी जुर्माने को मिलाकर भारत सरकार के प्रति उसकी कुल देनदारी पांच हजार सात सौ करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकती है। फ्रांस की इस कंपनी के लिए यह बहुत बड़ा व्यापारिक नुकसान है क्योंकि पेरनोड रिकार्ड बिक्री के लिहाज से भारत को दुनिया भर में अपना सबसे बड़ा बाजार मानती है और देश में उसकी कुल बिक्री का पांच प्रतिशत हिस्सा अकेले दिल्ली से आता था।