IAS, IPS और IFS अफसरों को कोर्ट केस लड़ने के लिए मिलेगी सरकारी आर्थिक मदद, रिटायर्ड अधिकारियों को भी मिलेगा लाभ
मध्य प्रदेश में IAS, IPS और IFS अधिकारियों को सरकारी कार्यों से जुड़े कोर्ट मामलों में कानूनी और वित्तीय सहायता मिलेगी। DoPT के निर्देश के बाद GAD ने कार्रवाई शुरू की। रिटायर्ड अधिकारियों को भी मिलेगा लाभ।
भोपाल। केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद मध्य प्रदेश में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों को सरकारी कार्यों से जुड़े कोर्ट मामलों में कानूनी और वित्तीय सहायता देने की तैयारी शुरू हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस संबंध में कार्रवाई शुरू कर दी है। नई व्यवस्था का लाभ कार्यरत और सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों को मिलेगा, लेकिन यह सुविधा केवल सरकारी ड्यूटी से जुड़े मामलों में ही उपलब्ध होगी।
डेढ़ माह पहले DoPT ने जारी किए थे निर्देश
केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय (DoPT) ने 15 जून 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर निर्देश दिए थे कि अखिल भारतीय सेवा (IAS, IPS, IFS) अधिकारियों को कानूनी मामलों में सहायता देने संबंधी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके बाद अब मध्य प्रदेश का सामान्य प्रशासन विभाग इस पर अमल की प्रक्रिया शुरू कर रहा है।
क्यों लिया गया फैसला?
DoPT के मुताबिक, हाल के वर्षों में कई मामलों में यह भ्रम की स्थिति बनी रही कि अधिकारियों को सरकारी कानूनी सहायता कब मिलेगी और कब नहीं। इसी भ्रम को दूर करने के लिए पुराने नियमों और आदेशों को फिर से स्पष्ट किया गया है।
किन मामलों में मिलेगी कानूनी सहायता?
सरकार की ओर से सहायता तभी मिलेगी जब मामला अधिकारी के सरकारी कर्तव्यों या आधिकारिक कार्यों से जुड़ा होगा।
- यदि अधिकारी के खिलाफ सरकारी कार्य के कारण मुकदमा दर्ज होता है और सरकार को लगता है कि उसका बचाव सार्वजनिक हित में है।
- यदि अधिकारी अपनी आधिकारिक कार्रवाई को सही साबित करने के लिए सरकार की अनुमति से अदालत जाता है।
- जरूरत पड़ने पर सरकार मुकदमे के खर्च के लिए ब्याज-मुक्त एडवांस राशि भी उपलब्ध करा सकेगी।
किन मामलों में नहीं मिलेगी सहायता?
निम्न परिस्थितियों में सरकारी कानूनी या वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी—
- मामला अधिकारी के निजी विवाद या निजी कार्य से जुड़ा हो।
- मुकदमे का सरकारी कार्यों से कोई संबंध न हो।
- निजी मामलों में खर्च की प्रतिपूर्ति सामान्यतः नहीं की जाएगी।
रिटायर्ड अधिकारियों को भी मिलेगा लाभ
DoPT ने स्पष्ट किया है कि 20 जनवरी 1977 के आदेशों के अनुसार सेवानिवृत्त IAS, IPS और IFS अधिकारियों को भी सरकारी कार्यों से जुड़े मामलों में वही कानूनी सहायता मिलेगी जो कार्यरत अधिकारियों को मिलती है। हालांकि भविष्य निधि (PF) से अग्रिम राशि का प्रावधान उन पर लागू नहीं होगा।
ऐसे मिलेगी वित्तीय सहायता
- मुकदमे के खर्च के लिए सरकार ब्याज-मुक्त एडवांस दे सकेगी।
- एडवांस लेने के लिए अधिकारी को निर्धारित प्रारूप में बॉन्ड भरना होगा।
- बाद में खर्च की प्रतिपूर्ति स्वीकृत होने पर एडवांस राशि का समायोजन किया जाएगा।
- रिटायर्ड अधिकारियों को भी निर्धारित शर्तों के तहत आर्थिक सहायता मिलेगी।
UPSC से कब ली जाएगी राय?
यदि मामला संविधान के अनुच्छेद 320(3) के दायरे में आता है, तो कानूनी खर्च की प्रतिपूर्ति या सहायता देने से पहले आवश्यकता पड़ने पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से परामर्श लिया जाएगा। जरूरत के अनुसार वित्त मंत्रालय और विधि मंत्रालय की भी राय ली जा सकती है।
सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए प्रमुख शर्तें
- एक समय में तीन से अधिक मामलों में सहायता नहीं दे सकेंगे।
- सेवानिवृत्ति के तीन वर्ष बाद किसी अधिकारी की विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई में सहायता नहीं कर सकेंगे।

