इंदौर में ‘वंदे मातरम्’ विवाद ने पकड़ा तूल: वीडियो, बयान और आरोपों के बीच सियासत से अदालत तक पहुंचा मामला
पार्षद रुबीना खान के पुराने वीडियो से उठे सवाल, राजनीतिक बयानबाजी तेज। सोशल मीडिया से उठी चिंगारी अब न्यायालय की दहलीज तक पहुंची।
मध्यप्रदेश के इंदौर में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे का रूप ले चुका है। नगर निगम के बजट सत्र में उठी यह बहस अब वीडियो, बयान, आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि प्रदेश स्तर पर भी नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है।
सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कांग्रेस पार्षद रुबीना खान के दो पुराने वीडियो सामने आए, जिनमें वह ‘वंदे मातरम्’ गाते हुए दिखाई दे रही हैं। यह वीडियो एक 2023-24 के बजट सत्र का बताया जा रहा है, जबकि दूसरा 2026-27 के सत्र का है। इन वीडियो के सामने आने के बाद उनके उस बयान पर सवाल खड़े हो गए, जिसमें उन्होंने धार्मिक आधार पर इस गीत को गाने से इनकार किया था।
पुराने वीडियो ने बदला पूरा नैरेटिव
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब नगर निगम के बजट सत्र के दौरान कुछ पार्षदों द्वारा ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार किए जाने की खबर सामने आई। इसमें फौजिया शेख अलीम और रुबीना खान का नाम प्रमुखता से सामने आया। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए वीडियो और पोस्ट्स में दावा किया गया कि इन पार्षदों ने राष्ट्रगीत का विरोध करते हुए सदन छोड़ दिया। लेकिन जैसे ही रुबीना खान के पुराने वीडियो सामने आए, पूरे विवाद का रुख बदल गया। अब सवाल यह उठने लगा कि जब वह पहले ‘वंदे मातरम्’ गाती रही हैं, तो अब इससे इनकार क्यों किया गया।
वीडियो वायरल होने के बाद जब रुबीना खान से इस पर सवाल किए गए, तो उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने कभी ‘वंदे मातरम्’ का अनादर नहीं किया। उनका कहना था कि जैसे-जैसे उन्होंने इस्लाम को गहराई से समझा और नमाज पढ़ना शुरू किया, उन्हें यह बताया गया कि वंदना केवल अल्लाह की ही की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह पिछले 15 वर्षों से पार्षद हैं और इस दौरान कई बैठकों में शामिल रही हैं। उनके अनुसार, उन्होंने कभी गीत नहीं गाया, लेकिन हमेशा इसके दौरान खड़े होकर सम्मान जरूर दिया है। साथ ही, उन्होंने अपने उस विवादित बयान—जिसमें उन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी—को लेकर भी माफी मांगी और इसे अपनी गलती स्वीकार किया।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया और अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत
इस पूरे मामले पर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान कांग्रेस पार्टी के लिए सर्वोपरि हैं और यह पार्टी की आत्मा हैं। पटवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का गीत गाना या न गाना उसका संवैधानिक अधिकार हो सकता है, लेकिन इस तरह का सार्वजनिक बयान देना उचित नहीं है।
उन्होंने संकेत दिए कि मामले को पार्टी की अनुशासन समिति के पास भेजा गया है और उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाने पर सत्तारूढ़ दल की भी आलोचना की और कहा कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विवादों को हवा दे रही है।
मुख्यमंत्री का सख्त रुख और महापौर का हमला
वहीं, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक जनप्रतिनिधि ने नगर निगम जैसे मंच पर ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार किया। मुख्यमंत्री ने इसे “बेशर्मी” करार देते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार देश की भावना के खिलाफ है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इधर, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस अपने नेताओं और पार्षदों के इस व्यवहार पर क्या कार्रवाई करेगी। महापौर ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति तुष्टिकरण पर आधारित है और वह राष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाने से बचती रही है। उनके बयान के बाद सियासी माहौल और ज्यादा गरमा गया।
कांग्रेस के भीतर टकराव, अदालत तक पहुंचा मामला
इस विवाद ने कांग्रेस के अंदर भी मतभेदों को उजागर कर दिया है। कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने अपनी ही पार्टी की पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना खान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा विवाद एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य असली मुद्दों से ध्यान भटकाना है। उन्होंने महापौर और कुछ पार्षदों के बीच “डील” होने तक का आरोप लगाया, जिससे मामला और उलझ गया है।
यह विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानूनी मोड़ भी ले चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और बयानों के आधार पर एक परिवाद न्यायालय में दायर किया गया है। परिवादी का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की स्थिति बनी है। शिकायत में भारतीय दंड संहिता और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। अब यह मामला अदालत में किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
उग्र होते बयान और तनाव के कारण असली मुद्दा भटका
विवाद उस समय और गंभीर हो गया जब एक सामाजिक संगठन के पदाधिकारी द्वारा विवादित बयान दिया गया। कथित रूप से एक पोस्ट में पार्षद फौजिया शेख अलीम के खिलाफ आपत्तिजनक घोषणा की गई, जिसमें उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर इनाम देने की बात कही गई। इस तरह के बयानों ने शहर का माहौल और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। प्रशासन और पुलिस अब पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
इस पूरे विवाद के बीच एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह मुद्दा वास्तव में इतना बड़ा है, या इसे राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। जहां एक ओर राष्ट्रगीत के सम्मान की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे के जरिए अन्य महत्वपूर्ण विषयों—जैसे भ्रष्टाचार, सड़क हादसे, और शहर के विकास—से ध्यान भटका रही है।
Varsha Shrivastava 
