ट्विशा शर्मा केस: MP हाईकोर्ट में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत पर सुनवाई
ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में CBI ने जांच तेज की, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह से भी की गई पूछताछ
भोपाल के ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर्ड जज सास गिरिबाला सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में आज बुधवार 27 मई को गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत निरस्त करने की मांग पर सुनवाई होनी है।

इस मामले में मध्य प्रदेश शासन और ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने अदालत में आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत रद्द की जानी चाहिए। वहीं, अब इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथों में आने के बाद कार्रवाई तेज हो गई है।
पिछली सुनवाई में सरकार ने उठाए सवाल
इस मामले में पिछली सुनवाई 25 मई को हुई थी। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत को बताया था कि गिरिबाला सिंह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, गिरिबाला सिंह की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेंद्र सिंह ने दलील दी थी कि उन्हें याचिका से जुड़े सभी दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए, इसलिए जवाब दाखिल नहीं किया जा सका। इसके बाद हाईकोर्ट ने जवाब पेश करने के लिए दो दिन का अतिरिक्त समय दिया था। अब इस मामले में आज विस्तृत सुनवाई होगी।
डिजिटल सबूतों पर केंद्रित हुई केस की पूरी जांच
ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब जांच एजेंसियों का फोकस डिजिटल साक्ष्यों पर आ गया है। भोपाल जिला कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान पुलिस ने बताया कि घटना से जुड़े मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टावर लोकेशन सुरक्षित रखने के लिए संबंधित टेलीकॉम कंपनियों को पत्र भेज दिए गए हैं।

यह जानकारी ट्विशा शर्मा के परिजनों द्वारा दायर आवेदन पर कोर्ट में पेश की गई। परिवार की ओर से दावा किया गया है कि ट्विशा की मौत के बाद गिरिबाला सिंह ने करीब 46 फोन नंबरों पर बातचीत की थी। इनमें कुछ नंबर न्यायिक अधिकारियों और जांच एजेंसियों से जुड़े लोगों के बताए जा रहे हैं।

परिवार का आरोप है कि इन कॉल्स की जांच से मामले के कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। SIT ने कोर्ट को बताया कि 12 मई से 20 मई तक की पूरी कॉल डिटेल सुरक्षित रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। टेलीकॉम कंपनियों से डेटा प्राप्त होते ही उसे केस डायरी का हिस्सा बनाकर अदालत में पेश किया जाएगा।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग
मामले में सिर्फ कॉल रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि CCTV फुटेज को लेकर भी कानूनी लड़ाई चल रही है। गिरिबाला सिंह की ओर से भोपाल जिला कोर्ट में एक आवेदन दायर कर CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इस आवेदन पर भी अदालत में सुनवाई हुई।

दूसरी ओर, ट्विशा के परिवार का कहना है कि डिजिटल सबूत इस मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों का कहना है कि जांच एजेंसियों को तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच करनी चाहिए।
CBI ने गिरिबाला सिंह से की पूछताछ
मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद CBI ने मंगलवार को कार्रवाई तेज कर दी। दोपहर में CBI की टीम गिरिबाला सिंह के घर पहुंची और उनसे लंबी पूछताछ कर बयान दर्ज किए। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने उनसे घटना वाले दिन की परिस्थितियों, पारिवारिक संबंधों और फोन कॉल्स को लेकर सवाल पूछे।

इसके बाद CBI की टीम 3 ईएमई सेंटर पहुंची, जहां ट्विशा शर्मा के परिजनों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली गई। जांच एजेंसी ने परिवार के सदस्यों से लिखित बयान भी लिए।

इसी दौरान CBI की एक अन्य टीम पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंची और पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात कर मामले की विस्तृत जानकारी मांगी। CBI ने विशेष जांच दल (SIT) से केस डायरी भी तलब की। प्रारंभिक जांच में केस डायरी अधूरी पाए जाने पर एजेंसी ने उसे पूरा कर दोबारा सौंपने के निर्देश दिए। देर रात SIT ने आवश्यक जानकारी जोड़कर संशोधित केस डायरी CBI को सौंप दी।
समर्थ सिंह पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
इस मामले में गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह को 22 मई को जबलपुर कोर्ट से गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले में कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जांच की जा रही है। सोमवार रात CBI ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की थी। FIR में दहेज के लिए पैसों की मांग, मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप शामिल किए गए हैं।

गौरतलब है कि अभिनेत्री ट्विशा शर्मा का शव 12 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे पर लटका मिला था। घटना के बाद से ही परिवार ने इसे आत्महत्या नहीं बल्कि प्रताड़ना से जुड़ा मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद 15 मई को गिरिबाला सिंह ने भोपाल कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिस पर उन्हें राहत मिली थी। अब उसी अग्रिम जमानत को निरस्त करने की मांग हाईकोर्ट में की गई है।
Varsha Shrivastava 
