मऊगंज में शुद्ध दूध पर फोकस, खाद्य विभाग ने चलाया ‘मिलावट पकड़ो’ अभियान

मऊगंज में मिलावटी दूध की रोकथाम के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने अभियान चलाया. रैपिड मिल्क टेस्टिंग किट से दूध की जांच की गई और सेंटर संचालकों को किट रखने की सलाह दी गई.

मऊगंज में शुद्ध दूध पर फोकस, खाद्य विभाग ने चलाया ‘मिलावट पकड़ो’ अभियान

रिपोर्टर राजेंद्र पयासी, मऊगंज

जिले में मिलावटी दूध की रोकथाम और उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं शुद्ध दूध उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने विशेष जागरूकता और जांच अभियान शुरू किया है। आयुक्त खाद्य सुरक्षा, मध्यप्रदेश शासन के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान के तहत दूध विक्रेताओं, कलेक्शन सेंटर और चिलिंग सेंटरों का निरीक्षण किया गया।

अभियान का नेतृत्व फूड इंस्पेक्टर अमित तिवारी ने किया। उन्होंने सुबह के समय दूध संग्रह करने वाले विक्रेताओं और विभिन्न दूध कलेक्शन एवं चिलिंग सेंटरों पर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान दूध के नमूनों की रैपिड मिल्क टेस्टिंग किट से प्राथमिक जांच भी की गई।

5 मिनट में मिलावट की प्राथमिक जांच

निरीक्षण के दौरान फूड इंस्पेक्टर अमित तिवारी ने दूध विक्रेताओं और सेंटर संचालकों को रैपिड टेस्टिंग किट के इस्तेमाल का तरीका मौके पर ही समझाया। उन्होंने बताया कि इस किट की मदद से करीब 5 मिनट में दूध में होने वाली कई प्रमुख मिलावटों की प्राथमिक पहचान की जा सकती है।

इनमें नमक, यूरिया, डिटर्जेंट पाउडर, स्टार्च, शक्कर और बाहरी वसा (एक्सटर्नल फैट) जैसी मिलावट शामिल हैं।

हर खेप की जांच के बाद ही दूध लेने की सलाह

फूड इंस्पेक्टर ने कलेक्शन और चिलिंग सेंटर संचालकों को निर्देश दिए कि वे अपने केंद्रों पर रैपिड टेस्टिंग किट उपलब्ध रखें। साथ ही दूध की प्रत्येक खेप को प्राथमिक जांच के बाद ही स्वीकार करने की सलाह दी गई।

अधिकारियों के मुताबिक दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित जांच बेहद जरूरी है। इससे मिलावट की शुरुआती स्तर पर ही पहचान करने में मदद मिल सकती है और खराब गुणवत्ता वाले दूध को आगे सप्लाई होने से रोका जा सकता है।

जागरूकता से ही मिलावट पर लगेगी रोक

खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि दूध में मिलावट रोकने के लिए सिर्फ विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए दूध संग्रहकर्ताओं, विक्रेताओं के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी जागरूक होना जरूरी है।

विभाग की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य दूध की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाने के साथ मिलावट को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा करना है। अभियान के बाद जिले में उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित दूध उपलब्ध कराने की दिशा में निगरानी और जांच व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।