भागवत बोले-हेडगेवार ने RSS बनाकर एकता और आजादी का संकल्प लिया
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के पैतृक गांव कंडाकुर्थी में श्री केशव स्फूर्ति मंदिर के उद्घाटन के मौके पर कहा कि समाज की आंतरिक फूट ही बार-बार विदेशी गुलामी का मुख्य कारण रही।
निजामाबाद: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को तेलंगाना के निजामाबाद जिले के कंडाकुर्थी गांव में RSS संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के पैतृक गांव में बने श्री केशव स्फूर्ति मंदिर का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने देश को विदेशी शासन से मुक्त कराने और हिंदू समाज में फैली फूट को दूर करने के उद्देश्य से ही RSS की स्थापना की थी।
भागवत जी ने कहा, “हेडगेवार का मानना था कि हिंदू समाज में एकता की कमी ही बार-बार गुलामी का सबसे बड़ा कारण रही है। अंग्रेज भारत पर शासन करने वाले पहले बाहरी आक्रमणकारी नहीं थे। समस्या सिर्फ बाहर से नहीं, बल्कि समाज के अंदर भी थी। हममें कुछ कमी थी, जिसकी वजह से हमें बार-बार हार का सामना करना पड़ा। इसलिए उस कमी को दूर करना जरूरी था।
उन्होंने बताया कि डॉ. हेडगेवार ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष, हथियारबंद विरोध समेत कई रास्तों पर काम किया, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि बिना समाज को मजबूत और एकजुट किए स्थायी आजादी संभव नहीं है।

भागवत की स्पीच की प्रमुख बातें:
- हिंदुत्व की परिभाषा: हिंदुत्व का मतलब दूसरों के साथ मिल-जुलकर रहना, अपने रास्ते पर चलना और सभी का सम्मान करना है। RSS की प्रार्थना भी इन्हीं गुणों को प्रतिबिंबित करती है और शाखाओं में यही संस्कार विकसित होते हैं।
- हेडगेवार का विजन: वे हिंदुओं को मजबूत, निडर और सद्गुणी इंसान बनाने के पक्षधर थे। अगर इन कमियों को दूर नहीं किया गया तो देश को बार-बार आजादी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।
- RSS का उद्देश्य: संघ की स्थापना किसी के खिलाफ नहीं हुई थी। यह किसी पर हमला करने के लिए नहीं, बल्कि मातृभूमि को गुलामी से मुक्त कराने के लिए शुरू किया गया था।
- आज का कार्य: हेडगेवार के विचारों पर चलने वाले स्वयंसेवक आज भी समाज को मजबूत बनाने में लगे हैं। कंडाकुर्थी का यह स्फूर्ति केंद्र देश के लिए निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा देगा।
भागवत जी ने इस मौके पर कहा कि कंडाकुर्थी अब सिर्फ हेडगेवार जी का पैतृक गांव नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और समाज सुधार की प्रेरणा का केंद्र बन गया है। यह कार्यक्रम RSS के शताब्दी वर्ष (2025-2026) के दौरान आयोजित किया गया। कंडाकुर्थी गांव को हेडगेवार जी की स्मृति में विकसित किया जा रहा है, जहां स्फूर्ति मंदिर के अलावा प्रदर्शनियां और स्मारक भी विकसित किए गए हैं।

