नवरात्रि विसर्जन में सहरिया समाज पर हमला, पुलिस मौन

घटना शिवपुरी जिले के कंचनपुरा गांव की है जहाँ नवरात्रि विसर्जन के दौरान सहरिया आदिवासी समाज पर दबंगों ने हमला कर दिया। पुलिस पर आरोप है कि उसने न FIR दर्ज की, न मेडिकल सही से कराया और अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

नवरात्रि विसर्जन में सहरिया समाज पर हमला, पुलिस मौन
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1 अक्टूबर की रात जब सहरिया आदिवासी समाज के लोग नवरात्रि के बाद माता की प्रतिमा का विसर्जन कर रहे थे तो उसी समय कुछ दबंग युवक शराब के नशे में जुलूस में घुस कर डांस करने लगे। जब आदिवासियों ने इसका विरोध किया तो दबंगों ने जातिसूचक अश्लील गालियां दीं फिर लाठियों और पत्थरों से उन पर हमला कर दिया।

मामले की शिकायत जब लोगों ने पुलिस से की तो पुलिस न तो एफआईआर दर्ज की और न ही युवकों के खिलाफ कोई एक्शन लिया। सहरिया क्रांति आंदोलन के संयोजक संजय बेचैन ने कहा यह घटना कोई सामान्य झगड़ा नहीं, यह जातीय उत्पीड़न है। पुलिस दबंगों को संरक्षण दे रही है।

क्या है पूरा मामला?

घटना 1 अक्टूबर की है। कंचनपुरा गांव के सहरिया समाज लोग माता के विसर्जन का जुलूस निकाल रहे थे। इसी बीच गांव के कुछ युवक जुलूस में नशे की हालत में घुस आए। जुलूस में कई औरतें और बच्चियां भी थीं। जब सहरिया समाज के लोगों ने उनसे कहा कि ये मां का आयोजन है, और यहां महिलाएं भी हैं, ऐसी हरकतें मत करो तो सभी युवक बदतमीजी पर उतर आए।

सबसे पहले युवकों ने गालियां दीं, जाति के बारे में बोला फिर उन पर लाठी और पत्थरों से हमला करने लगे। आरोपियों में इंदरवीर, शिवराय, अटू, गोपाल, रामवीर, बंटी, मोनू, मंगलसिंह और नरेश शामिल हैं। घटना के बाद जब पीड़ित शिवपुरी जिले के मायापुर थाना में रिपोर्ट लिखवाने गए तो पुलिस ने सिर्फ औपचारिक कार्रवाई की, लेकिन एफआईआर की प्रति नहीं दी। मेडिकल भी आधा-अधूरा कराया गया। जिनकी हालत गंभीर थी, उन्हें अस्पताल नहीं भेजा गया। कुछ घायलों के मेडिकल नहीं किए गए।

घटना को 3 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक इस मामले से जुड़े एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

सहरिया क्रांति के मोहर सिंह आदिवासी ने इस घटना को “आदिम युगीन अत्याचार” बताया है और कहा है कि-

"लोकतंत्र के नाम पर अब भी आदिवासी को इंसाफ नहीं मिलता। सहरिया क्रांति ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो।
पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री और राज्यपाल से मिलने भोपाल जाएंगे।"

ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में बाबू, विनोद, गोपाल, शंकर, भैयालाल हक्के, राजकुमार, बल्लू, प्रहलाद, गुलाबसिंह सहित 15 से अधिक आदिवासी शामिल हैं।

वहीं मायापुर थाना प्रभारी नीतू सिंह का कहना है कि—
"झगड़े की सूचना मिली थी, हमने कुछ लोगों का मेडिकल भी कराया है, लेकिन दशहरा पर्व में व्यस्त रहने के कारण मामला कायम नहीं हुआ जिसे हम फरियादी के आते ही कायम करेंगे, पुलिस मामले में आरोपियों के साथ कानून सम्मत कार्रवाई करेगी।"