कर्नाटक में हिजाब बैन खत्म: नए आदेश में स्कूलों में कलावा, रुद्राक्ष और जनेऊ पहनने की भी अनुमति

कर्नाटक सरकार ने स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पर लगी रोक हटाई, 4 साल बाद बदला फैसला

कर्नाटक में हिजाब बैन खत्म: नए आदेश में स्कूलों में कलावा, रुद्राक्ष और जनेऊ पहनने की भी अनुमति

कर्नाटक सरकार ने स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में लागू 2022 के विवादित हिजाब बैन आदेश को वापस ले लिया है। नए आदेश के तहत अब छात्र-छात्राओं को हिजाब के साथ-साथ कलावा, रुद्राक्ष, जनेऊ, पगड़ी और अन्य धार्मिक प्रतीक पहनने की अनुमति दी गई है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अनुमति स्कूलों के अनुशासन, यूनिफॉर्म नियमों और शैक्षणिक वातावरण के दायरे में ही लागू होगी।

राज्य की कांग्रेस सरकार के इस फैसले को हिजाब विवाद पर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव माना जा रहा है। इससे पहले तत्कालीन भाजपा सरकार ने फरवरी 2022 में ऐसा आदेश जारी किया था, जिसके बाद सरकारी शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनकर कक्षा में आने पर रोक लग गई थी।

2021 में उडुपी से शुरू हुआ था विवाद

हिजाब विवाद की शुरुआत दिसंबर 2021 में कर्नाटक के उडुपी जिले के एक सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज से हुई थी। यहां छह मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर क्लास में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। इसके विरोध में छात्राएं धरने पर बैठ गईं। मामला धीरे-धीरे पूरे राज्य में फैल गया और कई कॉलेजों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

इसके जवाब में कुछ हिंदू संगठनों से जुड़े छात्रों ने भगवा शॉल पहनकर कॉलेज आना शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद ने राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग ले लिया। कई जगह तनाव और प्रदर्शन हुए, जिसके बाद राज्य सरकार ने स्कूल-कॉलेजों में धार्मिक पहचान वाले कपड़े पहनने पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया।

भाजपा सरकार ने क्या आदेश दिया था

फरवरी 2022 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने निर्देश जारी करते हुए कहा था कि सभी छात्रों को निर्धारित यूनिफॉर्म का पालन करना होगा। आदेश में कहा गया था कि ऐसे कपड़े पहनने की अनुमति नहीं होगी, जो “समानता, एकता और सार्वजनिक व्यवस्था” को प्रभावित करें। इसी आदेश के आधार पर कई सरकारी शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर रोक लागू की गई थी।

सरकार के फैसले का राज्यभर में समर्थन और विरोध दोनों हुआ। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया था, जबकि समर्थकों ने इसे स्कूलों में समानता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम कहा था।

हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

मार्च 2022 में यह मामला कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि हिजाब इस्लाम की “अनिवार्य धार्मिक प्रथा” साबित नहीं हुआ है। इसके बाद छात्राओं ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

अक्टूबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने विभाजित फैसला सुनाया। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हिजाब बैन को सही माना, जबकि जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कहा कि छात्राओं की शिक्षा और व्यक्तिगत पसंद अधिक महत्वपूर्ण है। दोनों जजों की अलग-अलग राय के कारण मामला बड़ी बेंच को भेज दिया गया, लेकिन लंबे समय तक इस पर अंतिम सुनवाई नहीं हो सकी।

चार साल बाद सरकार ने बदला फैसला

कानूनी प्रक्रिया लंबित रहने के बीच कर्नाटक में सत्ता बदल गई और कांग्रेस सरकार ने अब प्रशासनिक स्तर पर पुराना आदेश वापस ले लिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सरकार का कहना है कि छात्रों को शिक्षा के अधिकार के साथ अपनी धार्मिक पहचान रखने की भी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, बशर्ते इससे संस्थानों का अनुशासन प्रभावित न हो।

सरकार के इस फैसले के बाद एक बार फिर राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति बताया है, जबकि कांग्रेस ने इसे संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक समावेश का कदम करार दिया है।