MP-CG और राजस्थान के युवा विधायकों का सम्मेलन, CM ने कहा- दूसरे देश भारत से लोकतंत्र सीखते हैं

भोपाल में तीन राज्यों के युवा विधायकों का राजधानी में लगा जमावड़ा। दो दिन तक चलने वाले सम्मेलन में कुल पांच सत्र, एजेंडे में विजन 2047 शामिल।

MP-CG और राजस्थान के युवा विधायकों का सम्मेलन, CM ने कहा- दूसरे देश भारत से लोकतंत्र सीखते हैं

भोपाल। राजधानी में सोमवार से तीन राज्यों - मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ - के युवा विधायकों का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू हो गया है। यह सम्मेलन मध्य प्रदेश विधानसभा के तत्वावधान में, राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र-6) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्घाटन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। उद्घाटन सत्र में मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह भी उपस्थित रहे।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने युवा विधायकों को सदन में संबोधित कर कहा कि आज भी दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं है जिसमें अनेकता में एकता दिखाई देती हो। जनता के साथ हमारा संबंध कैसा है यह समझे विनम्रता से रहे। अपने विधानसभा में किस तरह से बता करें इस पर ध्यान देना होगा। मुझे पहली बार टिकिट मिली और वापस लौटानी पड़ी यह सब होता है। बैलेंस रखना पड़ता है। भगवान राम को सिंहासन मिलना था पर मिल गया वनवास हमें भगवान से सीखना चाहिए। देश में सरकारें बदलती रहती हैं। अटल जी की सरकार 1 वोट से चलो गई थी।

मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि लोकतंत्र के लिए संसदीय व्यवस्था में विधायक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एक विधायक लगभग 3 लाख वोटर का नेतृत्व करता है। ऐसे प्रशिक्षण युवा विधायकों के लिए बहुत आवश्य होते हैं। प्रशिक्षण में युवा विधायकों को कैसे काम करना यह शिखया जाता है। विपक्ष जनता की बात सरकार के समक्ष रखता है, सरकार करें ना करें या अलग बात है। 

युवा विधायक सम्मेलन को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि विधायक बनते हैं तो हमारे कुछ सपने भी होते हैं। नई सोच होती है, नई उड़ान होती है, नई व्यवस्था होती है। लेकिन अंत में हम चिट्ठी और फोन पर ही रह जाते हैं और हमारे कार्यकाल के 5 साल निकल जाते हैं। जनता यह देखती है कि आपने विधानसभा में उस क्षेत्र की कौन सी बात उठाई। महत्वपूर्ण यह होता है कि आपके सेक्टर को कौन सा कार्य आपके क्षेत्र को आगे बढ़ाए ओर समस्याओं को हटाए। बजट परेशानी हर जगह होती है कोई भी सरकार आपको आपके क्षेत्र में 1000 करोड़ नहीं देगी।चाहे वो कोई भी सरकार हो।

उमंग सिंघार ने कहा कि विपक्ष में यदि हम बात करते हैं तो सरकार से वह बता करते हैं जिसमें जनता का भला हो। विकास के नाम पर विरोध नहीं होना चाहिए। मेरा विचार है में विकास के काम में विरोध नहीं करता हूं। विकास पार्टी के हिसाब से नहीं होना चाहिए। हमारा देश लोकतांत्रिक देश है। नेता प्रतिपक्ष ने सीएम को सुझाव दिया कि नेतृत्व किसी पद से नहीं आता, नेतृत्व की शुरुआत कॉलेज से होती है। जो युवा के अंदर आग होती है मुझे सिस्टम से लड़ना है। राजनीति की जड़े कॉलेज यूनिवर्सिटी से शुरू होती है। लोकतंत्र में अपनी भागीदारी का विचार करना चाहिए। टेक्नोलॉजी का उपयोग कैसे करे यह हमें समझना है। चुनाव जीतना कला नहीं है ,चुनाव का मतलब संबंध है ,आप लोगो से जुड़ो....आप कभी चुनाव नहीं हारोगे।

55 युवा विधायक, 2 दिन में होंगे 5 सत्र

सम्मेलन में कुल 55 युवा विधायक शामिल हैं, जिनकी आयु 45 वर्ष से कम है। इसमें मध्य प्रदेश से 18, राजस्थान से 22 और छत्तीसगढ़ से 15 युवा विधायकों ने भाग लिया है। सभी विधायकों का स्वागत आदिवासी लोक नृत्य और पारंपरिक कार्यक्रमों के माध्यम से किया गया। विधायकों की पहले दिन ग्रुप फोटो भी विधानसभा परिसर में खिंची गई।

दो दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में कुल पांच सत्र आयोजित किए जाएंगे। पहले दिन तीन सत्र आयोजित किए गए, जिनमें लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी, संसदीय मर्यादा, लोकतंत्र की मजबूती और विकसित भारत 2047 तक पहुंचने में युवा विधायकों की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई। दूसरे दिन यानी 31 मार्च को दो सत्र होंगे, जिसमें विशेष रूप से “विकसित भारत 2047 – युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियां” पर मंथन होगा। इस अवसर पर एमआईटी पुणे के चेयरमैन डॉ. राहुल वी. कराड भी संबोधन देंगे।

समापन सत्र में राज्यसभा के उपसभापति होंगे शामिल

सम्मेलन का उद्देश्य युवा विधायकों को संसदीय प्रक्रियाओं, बहस कौशल और नीति निर्माण में बेहतर भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम में भाग लेने वाले विधायक अपने अनुभव साझा करेंगे और लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए नवाचार और युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर विचार-विमर्श करेंगे।

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह सम्मेलन के समापन सत्र में शामिल होंगे। इसके अलावा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष भी अगले दिन के सत्रों में अपनी मौजूदगी देंगे। कार्यक्रम के आयोजकों का कहना है कि यह सम्मेलन युवा नेताओं के लिए एक अनूठा मंच है, जो उन्हें न केवल संसदीय कार्यशैली समझने का अवसर देगा, बल्कि भविष्य में नीति निर्माण में उनकी भागीदारी को भी मजबूत करेगा।