मध्य प्रदेश में मत्स्य पालन को संगठित एवं लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति- नारायण सिंह पंवार
राजधानी भोपाल के जनसंपर्क भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पंवार ने बताई अपने विभाग की उपलब्धियां
भोपाल। प्रदेश सरकार के दो साल पूर होने के अवसर पर एक-एक कर सभी मंत्री अपने विभागों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने पेश कर रहें हैं। इसी कड़ी में सोमवार को राजधानी भोपाल के जनसंपर्क भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने अपने विभाग की उपलब्धियां गिनाईं।
मत्स्य विभाग मंत्री नारायण सिंह पंवार ने बताया कि मध्य प्रदेश में मत्स्य पालन को पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़ाकर एक संगठित और लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा सतत प्रयास किए जा रहे हैं। यह जानकारी मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पंवार ने जनसंपर्क भवन, भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी।
मंत्री पंवार ने बताया कि पिछले दो वर्षों में मत्स्य उत्पादन, बीज उत्पादन, अवसंरचना विकास, सहकारिता और मछुआ कल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में कुल 4.5 लाख मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन दर्ज किया गया है। ग्रामीण तालाबों, सिंचाई जलाशयों तथा बड़े जलाशयों में उत्पादकता में निरंतर वृद्धि हो रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 120 हैचरियाँ सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत 122.50 करोड़ रुपये की वित्तीय उपलब्धि अर्जित की गई है। वहीं मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से 87 प्रतिशत वित्तीय प्रगति प्राप्त हुई है, जिससे मछुआ परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
मछुआरों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 0 प्रतिशत ब्याज दर पर किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अंतर्गत 1,16,319 किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए गए। साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्मार्ट फिश पार्लर और बीज संवर्धन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया गया है।
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना के अंतर्गत जनजातीय मछुआ हितग्राहियों के लिए विशेष पहल की गई। इसके तहत 393 आदिवासी मछुआरों को आइस बॉक्स सहित मोटरसाइकिलें वितरित की गईं, जिससे उनके विपणन कार्य में सुविधा मिली है।
प्रदेश में वर्तमान में 2641 मत्स्य सहकारी समितियाँ सक्रिय हैं, जिनसे 99,951 सदस्य जुड़े हुए हैं। सहकारिता के माध्यम से मछुआरों को सामूहिक रूप से सशक्त बनाया गया है।
आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में इंदिरा सागर जलाशय में ड्रोन एवं जीपीएस आधारित निगरानी प्रणाली लागू की गई है। इसके साथ ही मछुआरों और मत्स्य कृषकों के लिए क्षमता संवर्धन एवं तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे युवाओं को मत्स्य उद्यमिता से जोड़ा जा सके।
पत्रकार वार्ता के अंत में मंत्री पंवार ने कहा कि विजन 2047 के अनुरूप जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए योजनाबद्ध कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। शासन की इन योजनाओं से मछुआ परिवारों की आय, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा में वास्तविक और सकारात्मक सुधार हुआ है।
Varsha Shrivastava 
