इंदौर: MPPSC कार्यालय के बाहर अभ्यर्थियों का धरना समाप्त

इंदौर में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग कार्यालय के बाहर अभ्यर्थियों द्वारा किया गया धरना अब समाप्त हो गया है।

इंदौर: MPPSC कार्यालय के बाहर अभ्यर्थियों का धरना समाप्त

इंदौर में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग कार्यालय के बाहर अभ्यर्थियों द्वारा किया गया धरना अब समाप्त हो गया है। यह आंदोलन 24 जनवरी से शुरू हुआ था और कोर्ट की अनुमति के अनुसार 27 जनवरी तक जारी रहा। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद अभ्यर्थियों ने शांतिपूर्ण तरीके से धरना समाप्त कर दिया। लेकिन स्टूडेंट्स और अभ्यर्थियों का कहना है कि अब तक प्रबंधन ने उनसे जाकर बात नहीं की है उनका ज्ञापन लेने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा है। 

आंदोलन को न्याय यात्रा 2.0 नाम दिया

नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन को अभ्यर्थियों ने न्याय यात्रा 2.0 नाम दिया था। यह धरना 10 सूत्रीय मांगों को लेकर किया गया, जिनमें परीक्षा प्रक्रिया, भर्ती और लंबित परिणामों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। कड़ाके की ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, लगातार चार दिन तक आयोग कार्यालय के बाहर डटे रहे। कई अभ्यर्थियों ने वहीं अस्थायी रूप से रुककर रात गुजारी।

6–7 मांगों में से केवल दो पर ही अमल

अभ्यर्थियों का कहना था कि दिसंबर 2024 में हुए पिछले आंदोलन के दौरान प्रशासन ने कई मांगें मानने का आश्वासन दिया था, लेकिन उनमें से अधिकांश अब तक पूरी नहीं हुईं। उनका दावा है कि उस समय मानी गई 6–7 मांगों में से केवल दो पर ही अमल हुआ, जबकि बाकी मुद्दे आज भी लंबित हैं। विशेष रूप से पदों की संख्या बढ़ाने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर असंतोष बना हुआ है।

धरने को लेकर हाईकोर्ट इंदौर से अनुमति ली

धरने को लेकर हाईकोर्ट इंदौर से अनुमति ली गई थी। NEYU के संयोजक राधे जाट के अनुसार, यह अनुमति Article 19 के तहत दी गई थी, जिसके बाद शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन आयोजित किया गया। आंदोलन के दौरान कोचिंग संस्थानों, लाइब्रेरी संचालकों और अन्य छात्रों ने भी समर्थन जताया । अभ्यर्थियों ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। वहीं, प्रशासन की ओर से अब तक इस धरने को लेकर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन आयोग और संबंधित विभागों की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी रही।